रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक 3 में रहने वाले नथुनी भगत अपनी अद्भुत आस्था और समर्पण के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। महाकाल के इस परम भक्त ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी एक भव्य शिव मंदिर के निर्माण में लगा दी है, जबकि वे स्वयं एक झोपड़ीनुमा छोटे से घर में रहते हैं। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से तैयार यह गुंबदनुमा शिव मंदिर अब नगर की शान बन गया है। पिछले सावन में मंदिर परिसर में शिव-पार्वती परिवार की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। इस अवसर पर नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन किए और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। नथुनी भगत ने यह मंदिर अपनी माता स्वर्गीय राजमती देवी की स्मृति को समर्पित किया है। उनका कहना है कि उनकी माता का सपना था कि गांव में एक सुंदर शिव मंदिर का निर्माण हो। इसी संकल्प को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया और अपनी सीमित आय के बावजूद मंदिर निर्माण के लिए लगातार मेहनत कर धन एकत्र करते रहे। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 32 फीट ऊंचा गुंबद है, जिसे पूरे नगर में सबसे ऊंचा माना जा रहा है। दूर-दूर से लोग इस मंदिर की शिल्पकला और भव्यता को देखने आते हैं। मंदिर के बगल में ही नथुनी भगत अब भी साधारण झोपड़ीनुमा निवास में रहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने घर के बड़े या सुंदर होने की खुशी नहीं, बल्कि इस बात की संतुष्टि है कि माता के सपने को साकार कर उन्होंने समाज को एक ऐसा धार्मिक स्थल दिया है, जहां लोग शांति और श्रद्धा से भगवान शिव के दर्शन कर सकें। नथुनी भगत की आस्था, सरलता और त्याग की यह मिसाल आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।


