भगवान का जन्म और तप कल्याणक मनाना पुण्य का संचय कराता है : मुनिश्री

जैनियों के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु और 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का गुरुवार को जन्म सह तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य जैनमुनि श्री 108 सुयश सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन मंदिर अपर बाजार में सुबह पार्श्वनाथ भगवान और भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक और पूजन हुआ। श्रद्धामय संगीत के साथ पार्श्वनाथ विधान किया गया। जैनमुनि सुयश सागर महाराज ने कहा कि भगवान का जन्म और तप कल्याणक मनाना हमें पुण्य का संचय कराता है। पार्श्वनाथ प्रभु की जन्म स्थली धर्मनगरी काशी वाराणसी के भेलूपुर में हुआ था। तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म काशी के राजा अश्वसेन और माता महारानी वामादेवी के घर से हुआ था। वहीं, भगवान चंद्रप्रभु का जन्म इक्ष्वाकु वंश में पौष मास की एकादशी को चंद्रपुरी वाराणसी में राजा महासेन और रानी सुलक्षणा देवी के घर हुआ था। शांतिधारा की गई, भजनों पर झूमे श्रद्धालु मंदिर में सुबह शांतिधारा का सौभाग्य पूरणमल दीपक कुमार, मानव, मोहित, पीयूष सेठी परिवार, नंदलाल, सुधीर कुमार, संदीप कुमार छाबड़ा परिवार, विमल कुमार, आदित्य कुमार, आयुष सोगानी परिवार, चंचल टोंग्या परिवार, नरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, मनीष कुमार, शब्द कुमार गंगवाल परिवार, प्रदीप कुमार, अनीता अजमेरा परिवार को मिला। संगीत के स्वर प्रख्यात भजन गायक हेमंत सेठी और उदित सेठी की टीम ने सुनाकर श्रद्धालुओं को झुमा दिया। आयोजन को लेकर जैन मंदिर परिसर भवन को भव्य और आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे सभागार में मुनिश्री ने पार्श्वनाथ भगवान और चंद्र प्रभु भगवान के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। जैन मंदिर में हुआ भगवान का अभिषेक और पूजन

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