मंदिर श्री गीता गायत्री जी पं. राजकुमार चतुर्वेदी के सान्निध्य में श्रीमद् भागवत कथा में व्यासपीठ से आचार्य डॉ. राजेश्वर महाराज ने विदुर के भक्ति प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं। भगवान कहते हैं कि मुझे अन्न, वस्त्र व आभूषण कुछ नहीं चाहिए। यदि आप मेरे पास हो तो एक पुष्प भी मुझे स्वीकार है। भक्तों के प्रेम के कारण बढ़ा हुआ प्रेम की जंजीरों में बंद होने के कारण मैं बार-बार इस धरा पर अवतार लेता हूं। कथा में सृष्टि की रचना व विस्तार, कुंति प्रसंग, भीष्म पितामह, बैकुंठ गमन का प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


