अमृतसर| जगन्नाथ यात्रा उत्सव 27 जून को होगा। परंतु इससे पहले श्री श्री गौर राधा कृष्ण इस्कॉन मंदिर चौक मौनी में भगवान जगन्ननाथ और भगवान बलदेव जी को 108 घड़ों में जल और अन्य तरल पदार्थ भरकर स्नान कराया जाएगा। इस स्नान को भक्त लोग देव स्नान पूर्णिमा भी कहते है। मंदिर के मुख्य सेवादार नारायण दास प्रभु के मुताबिक यह देव स्नान 11 जून को सुबह 6 बजे भगवान जगन्ननाथ जी को रतनजोत, चंदन पाउडर, चंदन इत्र, गुलाब इत्र समेत अन्य औषधियां डालकर स्नान करवाया जाएगा। वहीं स्नान के बाद भगवान को गज शिंगार करवा कर छप्पन भोग लगाए जाएंगे। नारायणदास प्रभु जी ने बताया कि स्नान की वजह से भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते है और 15 दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है। परंतु पुजारी रोजाना की तरह भगवान की सेवा करने रहते है। नारायण दास प्रभु ने भगवान के गज भेष जी कथा के बारे बताया। उन्होंने कहा कि भक्त गणपति भट्ट गणेश जी के भक्त हुए हैं। भक्त को पता चला कि भगवान कोई भी रूप धारण कर सकते है तो उन्होंने भगवान जगन्ननाथ के दर्शन गज भेष में करने की इच्छा जताई।


