रांची| श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में गुरुवार को वैशाख कृष्णपक्ष की वरुथिनी एकादशी व्रत को लेकर 24 अप्रैल को प्रभु से अनुग्रह और उनकी अहैतुकी कृपा पाने की अभिलाषा से कई अनुष्ठान का संपादन हुआ। वैष्णव आगम की पांचरात्र शाखा के विशाल साहित्य में सैकड़ों संहिताएं हैं। इसमें नारद पांचरात्र को विशेष महत्व प्राप्त है। इन्हीं नारद पांचरात्र के विधान से प्रातः 4.30 बजे कृपालु भगवान का विश्वरूप दर्शन कराकर मुमुक्षु चिंतकों को मोक्षरूप कृपा प्रदान करने वाले श्रीपद्मावती वल्लभ भगवान श्री दंपति का तिरूवाराधना हुआ। फिर दूध, दही, हरिद्राचूर्ण, चंदन, नारियल युक्त जल, गंगाजल, शहद और केसर से महाभिषेक हुआ।


