भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता का उदाहरण है : गिरधर शुक्ला

अमृतसर| हेल्पिंग हैंड वेलफेयर सोसायटी प्रोफेसर कॉलोनी की ओर से श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इसमें प्रवासी भलाई बोर्ड पंजाब सरकार के पूर्व वाइस चेयरमैन राम भवन गोस्वामी अपने साथियों के साथ पहुंचे। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष विजय कुमार, रंजीत कुमार, जगदेव जी, रजनीश, राजकुमार और राजलु ने श्रीराम दरबार भेंट कर गोस्वामी और उनकी टीम का सम्मान किया। कथा व्यास गिरधर शुक्ला ने भगवान राम के जीवन का वर्णन करते कहा कि श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने असंतों से असंगति करने की बात कही है। बुरे लोगों का संग छोड़ना, उनसे मोह तोड़ना, असहयोग करना और मदद बंद करना भी एक यज्ञ है। जब हम इसमें बलिदान देंगे तभी खुद को शुद्ध कर पाएंगे और रावणराज्य को मिटाकर रामराज्य की स्थापना कर सकेंगे। यही रामराज्य स्वराज्य है। स्वराज्य स्थापित किए बिना राक्षसी राज्य से मुक्ति संभव नहीं है। इसे आज की भाषा में प्लानिंग कहा जा सकता है। उन्होंने कहा भगवान राम का संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता का उदाहरण है। वनगमन के समय उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाया। केवट को गले लगाकर यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य एक समान हैं। जाति का कोई भेद नहीं है। वर्तमान में वंचित माने जाने वाले केवट समाज को भगवान राम ने गले लगाकर अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

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