भरतपुर मोतीमहल में थम गया झंडा विवाद:बेटे ने फहराया तिरंगा, विश्वेन्द्र भी बोले- ये सर्वोपरि, रियासती फ्लैग को लेकर अड़े समर्थक भी अब माने

भरतपुर पूर्व राजपरिवार में चल रहा झंडा विवाद शनिवार दोपहर में पूरी तरह शांत हो गया है। नया विवाद मोती महल पर फहरा रहे झंडे को लेकर हुआ था। गुरुवार को इस झंडे को उतारकर तिरंगा फहरा दिया गया। इसकी जानकारी पूर्व राजपरिवार सदस्य और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के बेटे अनिरुद्ध सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट करके दी थी। शुक्रवार शाम विश्वेन्द्र सिंह ने भी सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि तिरंगा हमारे लिए सर्वोपरि है। उन्होंने लोगों से 21 सितंबर को भरतपुर न आने की अपील की। इसके बावजूद आंदोलनरत लोग 21 सितंबर को मोती महल पर पूर्व राजपरिवार का झंडा फहराने पर अड़े हुए थे लेकिन अब 21 सितंबर के आंदोलन से एक दिन पहले समर्थको ने भी इस आंदोलन को वापस ले लिया है। विवादों में रहा भरतपुर का पूर्व राजपरिवार भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेन्द्र सिंह का पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से लंबे समय से विवाद चल रहा है। विवाद की जड़ में राजघराने की करोड़ों की प्रॉपर्टी, बेशकीमती स्वर्ण-आभूषण और एंटीक आइटम का शाही भंडार है। विवाद की शुरुआत करीब एक साल पहले विश्वेंद्र सिंह की ओर से उपखंड अधिकारी ट्रिब्यूनल भरतपुर में प्रार्थना पत्र देकर वरिष्ठ नागरिक के रूप में पत्नी और बेटे से भरण-पोषण मांगने से हुई थी। पहले बेटे ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट अब ताजा विवाद हाल में 23 अगस्त को अनिरुद्ध सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि – ‘कोठी बंध बारैठा भरतपुर पूर्व राजपरिवार की पैतृक संपत्ति है। इसे अवैध रूप से बेचा गया है, जबकि मेरी माता जी और मैंने इसकी अनुमति नहीं दी थी। उस समय मैं विदेश में पढ़ाई कर रहा था। मैं इस संपत्ति तथा अन्य संपत्तियों की बिक्री को न्यायालय में चुनौती दूंगा और उस पर स्थगन आदेश (स्टे) की मांग करुंगा।’ पिता ने सोशल मीडिया पोस्ट से ही दिया जवाब इसके जवाब में अगले दिन 24 अगस्त को विश्वेन्द्र सिंह ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट किया, इसमें लिखा कि… ‘जनता जनार्दन के लिए हकीकत की सूचना। आज अखबार में पढ़ा कि भरतपुर पूर्व राज परिवार की एक संपत्ति कोठी बंध बारैठा को अवैध रूप से बेचा गया है, जबकि हकीकत में कोठी बंध बारैठा मेरी निजी संपत्ति थी। पूर्व राज परिवार की संपत्ति नहीं थी। इसको बेचने के लिए मैं अधिकृत था। मेरी पत्नी दिव्या सिंह ने मुझसे जबरदस्ती लिखवा कर इसे मुझसे बिकवाया था। दिव्या सिंह ने उस पैसे से नई दिल्ली में एक महंगा फ्लैट अपने नाम से लिया। इसलिए यह कहना कि कोठी बंध बारैठा को अवैध रूप बेचा गया है, ये गलत है।’ इसी पोस्ट में विश्वेन्द्र सिंह ने अपने आपको मजबूर बताते हुए लिखा- ‘आज मुझे अपने परिवार के खिलाफ बोलना पड़ रहा है। अप्रैल 2021 से मैंने मोती महल परिसर में प्रवेश ही नहीं किया है। इसी बात का फ़ायदा उठाते हुए मेरी पत्नी व पुत्र ने मोती महल की बेशकीमती चीजें यहां तक कि किवाड़, खिड़की बेच दिए हैं। हमारे पुरखों के जमाने से ऐतिहासिक झंडा जो मोती महल में लगा हुआ था,उसको भी बदल दिया है।’ ‘बहुत जल्द ही हाईकोर्ट में मेरा केस आ रहा है। इसी बौखलाहट में ये लोग बेबुनियादी बयानबाजी कर रहे हैं। जिस दिन से मैंने मोती महल छोड़ा है, उस दिन से महल में स्थित मंदिरों की पूजा अर्चना भी बंद करवा दी गई है।’ 21 सितंबर को महल पर रियासत का झंडा फहराने का ऐलान विश्वेन्द्र सिंह की इस पोस्ट के बाद ‘विरासत बचाओ स्वाभिमान बचाओ’ के संतोष फौजदार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इसमें भरतपुर के सर्वसमाज से अपील की गई- 21 सितंबर के दिन मोती महल पर रियासत के झंडे को फिर से फहराया जाएगा। मौजूदा झंडे को वहां से हटा दिया जाएगा। वहां पहले सुबह 11 बजे से 12 बजे तक धरना भी दिया जाएगा। अनिरुद्ध ने सोशल मीडिया पर डाला वीडियो विवाद के बीच अनिरुद्ध सिंह ने 26 अगस्त को सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कहा- कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अजीबोगरीब पोस्ट कर दावा कर रहे हैं कि मोती महल का झंडा बदल दिया गया है। जबकि डेमोक्रेसी में अपने घर पर कोई भी झंडा लगा सकता है। बस वो अवैध न हो। अगर इन लोगों में हिस्ट्री को पढ़ने की या रिसर्च करने की सद्बुद्धि होती तो उन्हें पता चलता कि मौजूदा झंडे की रिलेवेंसी कहां से आती है। ये 21 सितंबर को कोई फिजूल की प्रोटेस्ट करना चाहते है तो मैं उन्हें बता दूं कि कोई फायदा नहीं होगा। इस पूरे मामले की पहले ही सरकार के बड़े मंत्रियों और बड़े पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी गई है। जो सस्ते लोग हैं, दलाली करते हैं और अवैध वसूलियां करते है वो लोग अपने धंधे और अपनी शराब के कंजम्प्शन पर ध्यान दे। हम सब ने पहले ही एसडीएम कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का फैसला भी देख लिया है, अब मामला उच्च न्यायालय में है। 29 अगस्त को हुई थी महापंचायत पुरातत्व धरोहर संरक्षण समिति के अध्यक्ष दिनेश सिनसिनी ने बताया कि पूर्व राजपरिवार के पैतृक गांव सिनसिनी में 29 अगस्त को महापंचायत बुलाई गई थी। इसमें विश्वेन्द्र सिंह से मोबाइल पर बात हुई थी। उन्होंने कहा कि इस महापंचायत का 21 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल उनके पास आए। वहां से 21 लोगों का प्रतिनिधिमंडल बना कर अगले दिन 30 अगस्त को उनके पास भेजा गया था। 21 सितंबर को महल पर रियासतकालीन झंडा फहराने का फैसला विश्वेन्द्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को कहा- आज मैं आपसे दिमाग से नहीं दिल से बात कर रहा हूं। वहां का माहौल बहुत ही ज्यादा भावुक हो गया था। इसके बाद वहीं ये तय किया गया कि अब 21 तारीख को हर हाल में मोती महल पर रियासतकालीन झंडा वहां फिर से लगाया जाएगा। हालांकि इस दौरान विश्वेन्द्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि वो खुद तो वहां नहीं आएंगे। ये प्रॉपर्टी उनकी ही है तो वो अपनी तरफ से प्रतिनिधिमंडल के 5 लोगों को नॉमिनेट और अधिकृत करके वहां भेजेंगे। ये वहां झंडा फिर से फहरा देंगे। इस महापंचायत की बात भरतपुर की दूसरी सरदारी में पहुंची तो सभी जगह 21 तारीख को भरतपुर में मोती महल पहुंचने और वहां झंडा फहराने के फैसले होने लग गए हैं। अनिरुद्ध ने कई पोस्ट डाली, लेकिन कोई असर नहीं इसके बाद अनिरुद्ध सिंह ने 31 अगस्त को एक सोशल मीडिया पोस्ट कर मोती महल पर उनके द्वारा बदले गए झंडे के कलर को लेकर और इसके संबंध को लेकर जानकारी दी गई। हालांकि, उनकी इस पोस्ट का भी कोई असर नहीं हुआ। भरतपुर के अलग-अलग गांवों में झंडा विवाद को लेकर महापंचायतें होती रहीं। इस बीच कुछ महा पंचायतों में ये भी तय किया कि अब न सिर्फ झंडा वापस लगाया जाएगा, बल्कि विश्वेन्द्र सिंह को भी दोबारा से मोती महल परिसर में ले जाया जाएगा। उन्हें अब पूरी सुरक्षा के साथ वहीं रहना होगा। इधर अनिरुद्ध सिंह अपनी अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट में झंडे को लेकर सफाई देते रहे। उन्होंने इसके जयपुर से संबंध होने के दावे का खंडन किया तो पुराने झंडे के युद्ध से जुड़ा होने की बात भी कही। इसके बावजूद झंडा विवाद नहीं थमा। अनिरुद्ध ने 18 सितंबर को लिया तिरंगा फहराने का फैसला इस बीच 17 सितंबर को अनिरुद्ध सिंह ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट डाली। इसमें उन्होंने कहा कि ‘कल रात कुछ गुंडों ने मोती महल पैलेस के परिसर में घुसपैठ की और जानबूझकर तोड़फोड़ की। इन दुराचारी प्रयासों का लक्ष्य महल की छत पर लगे ध्वज स्तम्भ को नुकसान पहुंचाना था। जो हमारी विरासत और सम्मान का प्रतीक है। इसके अलावा ध्वज को फाड़ने का भी प्रयास किया गया। मेरी मां और मैंने भरतपुर एसपी व उनकी टीम से मांग की है कि वे महल के चारों ओर सुरक्षा कड़ी करें और निगरानी बढ़ाए। इसके अगले दिन 18 सितंबर को ही अनिरुद्ध सिंह ने एक और पोस्ट किया कि – भरतपुर एसपी दिगंत आनंद से बात में सहमति बनी है कि मोती महल पैलेस पर तिरंगा फहराया जाएगा। तिरंगा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का सर्वोच्च प्रतीक है।’ विश्वेन्द्र सिंह ने पोस्ट किया- तिरंगा सर्वोपरि, 21 को भरतपुर न आएं शुक्रवार (19 सितंबर) देर शाम विश्वेन्द्र सिंह ने सोशल मीडिया पर फिर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि – पिछले दिनों मोती महल परिसर में हमारे रियासत कालीन झंडे को बदला गया था। सर्वसमाज एवं 36 कौम की सरदारी और कमेटी ने एकजुट होकर विरोध करने के कारण मोती महल परिसर में उस झंडे को बदलकर हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लगाया गया है। जिसका हम समस्त देशवासी सम्मान करते हैं। तिरंगा हम सभी के लिए सर्वोपरि हैं। मैं इसके लिए समस्त जनता जनार्दन का धन्यवाद ज्ञापित करता हूं और आग्रह करता हूं कि 21 सितंबर को भरतपुर आने का कष्ट न करें। एक दिन पहले आंदोलन लिया वापस, बोले- कानून व्यवस्था नहीं बिगाड़ना चाहते
आंदोलन से ठीक एक दिन पहले 20 सितंबर को दोपहर में संतोष फौजदार और दिनेश सिनसिनी मीडिया के सामने आए। उन्होंने 21 सितंबर को मोती महल पर रियासत कालीन झंडे को लगाने को लेकर होने वाले आंदोलन को वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि पहले खुद विश्वेन्द्र सिंह ने ये कहा था कि वो 5 लोगो को अपनी तरफ से ये परमिशन देंगे कि वो मोती महल में रियासतकालीन झंडा लगा कर आए, लेकिन अब वो इसके लिए तैयार नहीं है। हम ये भी नहीं चाहते कि कल हम झंडा लगाए और दो दिन बाद वो वहां से उतार दिया जाए।

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