भाई थोड़ा गुटखा मुझे भी खिलाओगे क्या:16 साल पहले हुए कैंसर ने छीना चेहरा, जबड़ा निकलना पड़ा, वहीं दिखा कर जागरूक कर रहे

भाई, थोड़ा सा गुटखा मुझे भी खिला दो। जब सामने वाला व्यक्ति 56 साल के जाकिर सिद्दीकी को गुटखा देने के लिए हाथ बढ़ाता है, तब जाकिर अपना चेहरा उनके सामने कर देते हैं। वे अपनी पुरानी तस्वीर और मौजूदा चेहरा दिखाकर कहते हैं- मैं पहले ऐसा था, अब ऐसा हूं। क्या तुम भी ऐसा ही बनना चाहते हो? यह भावनात्मक चोट इतनी गहरी होती है कि कई लोग मौके पर ही गुटखा थूक देते हैं और दोबारा न छूने की कसम खाते हैं। कहानी है झुंझुनूं के जाकिर सिद्दीकी की। जिन्होंने कैंसर को मात तो दी लेकिन अपना चेहरा खो दिया। गुटखे की लत ने उन्हें जिंदगी भर का दुःख दे दिया। वे अब इसी तरह लोगों को गुटखा न खाने सिगरेट न पीने के लिए प्रेरित करते हैं। अब तक जाकिर ने 800 से अधिक लोगों की जिंदगी से तंबाकू और गुटखे का जहर निकाल फेंका है। मुंह का छाला बना कैंसर जाकिर बताते हैं- बात 2009 की शुरुआत की है। वो मेरे लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। मुंह का एक साधारण सा छाला, जो हफ्तों तक ठीक नहीं हुआ। अंततः कैंसर की पुष्टि के रूप में सामने आया। जाकिर बताते हैं- जैसे ही रिपोर्ट मिली, लगा सब खत्म हो गया। मौत सामने खड़ी दिखने लगी। मुझे लगा कैंसर यानी लाइलाज मौत। मैंने तो इलाज तक के लिए मना कर दिया था क्योंकि समाज में वहम था कि ऑपरेशन के बाद बीमारी और बिगड़ जाती है। लेकिन परिवार और दोस्तों के हौसले ने उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया। फिर लौटा कैंसर और जबड़ा निकालना पड़ा जाकिर बताते हैं- 13 मई 2009 को पहला ऑपरेशन हुआ, रेडियोथेरेपी चली, लेकिन दो महीने बाद ही कैंसर ने फिर दस्तक दी। दोबारा ऑपरेशन हुआ, जबड़ा निकालना पड़ा। चेहरा पूरी तरह बदल गया, बोलना और खाना मुश्किल हो गया। जाकिर का नशा छुड़वाने का तरीका दुनिया में सबसे अलग और दिल दहला देने वाला है। वे किसी को गुटखा खाते देखते हैं तो उसे टोकते नहीं, बल्कि हाथ फैलाकर कहते हैं— “भाई, थोड़ा सा गुटखा मुझे भी खिला दो।” जाकिर केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों और सेमिनारों में जाकर बच्चों को जागरूक करते हैं। वे उन लोगों के घर तक जाते हैं जो लत नहीं छोड़ पा रहे, उनके बच्चों और पत्नियों से बात करते हैं और समझाते हैं कि एक इंसान की लत पूरे परिवार को कैसे उजाड़ देती है। जाकिर बताते हैं- अगर मेरा बिगड़ा हुआ चेहरा देखकर किसी एक व्यक्ति की नींद उड़ जाए और वह इस जहर को छोड़ दे, तो मैं मानता हूं कि मेरी तकलीफ सफल हो गई। 16 साल से जारी है मिशन जाकिर अली आज उन लोगों के लिए एक जीता-जागता उदाहरण हैं जो समझते हैं कि तंबाकू का सेवन सिर्फ एक आदत है। वे बताते हैं कि यह आदत नहीं, एक सजा है जो आप खुद को और अपने परिवार को देते हैं। 16 सालों से जारी उनका यह मिशन आज पूरे झुंझुनूं जिले में चर्चा का विषय है।

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