भाजपा का G-RAM-G के लिए जागरूकता अभियान आज से:पंजाब के फाजिलिका में मजदूरों के बीच बात रखेंगे प्रदेश अध्यक्ष व नेता, पूरे पंजाब में चलेगा प्रोग्राम

भारतीय जनता पार्टी ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी G-RAM-G के समर्थन में पंजाब भर में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत फाजिलिका जिले के गांव खाऊ वाली डाब से की जा रही है, जहां मजदूरों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों को एकत्र कर योजना से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।भाजपा ने ऐलान किया है कि वीरवार को जालंधर और शुक्रवार को लुधियाना में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विरोधी दलों पर भ्रम फैलाने का आरोप भाजपा प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस G-RAM-G को लेकर मजदूरों में भ्रम फैला रही हैं। भाजपा का उद्देश्य सीधे मजदूरों से संवाद कर योजना की वास्तविक जानकारी देना है, ताकि वे किसी भी राजनीतिक दुष्प्रचार का शिकार न हों। कृषि कानूनों से सबक, चुनाव से पहले माहौल टटोल रही भाजपा भाजपा ने तीन कृषि कानूनों के दौरान पंजाब में बने विरोधी माहौल से सबक लिया है। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था।इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार चुनाव से करीब एक साल पहले ही गांवों में जाकर मजदूरों से सीधा संवाद कर रही है, ताकि किसी भी असंतोष को समय रहते संभाला जा सके। पार्टी अब कानूनों और योजनाओं की जानकारी खुद जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। आप और कांग्रेस पहले ही जता चुकी हैं विरोध आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव तक पारित कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा के खिलाफ गांव-गांव जाकर विरोध दर्ज कराने की रणनीति बनाई है।आप और कांग्रेस के नेता मजदूरों के बीच जाकर G-RAM-G के कथित नुकसान गिना रहे हैं। नाभा में मनरेगा मजदूरों का विरोध, फ्लैक्स लगाए पटियाला जिले के नाभा के पास गांवों में मनरेगा मजदूरों ने योजना के विरोध में फ्लैक्स लगाए हैं। मजदूरों ने G-RAM-G के समर्थन में वोट करने वाले सांसदों से नौ सवाल पूछे हैं।मजदूरों का आरोप है कि इस कानून को पारित करते समय संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।

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