“भारतीय ज्ञान परंपरा में रसायन” के महत्व पर चर्चा:संधारणीय रसायनशास्त्र और भारतीय भाषाओं की तकनीकी शब्दावली पर हुआ विमर्श

जयपुर में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार और एस. एस. जैन सुबोध कॉलेज के संयुक्त देखरेख में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “संधारणीय रसायन शास्त्र में अभिनव उन्नति एवं भारतीय भाषाओं में तकनीकी शब्दावली की भूमिका” था। इस कार्यक्रम में लगभग 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जहां 8 विषय-विशेषज्ञों ने अपने शोध-आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किए। राजकीय महाविद्यालय झालावाड़ की संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. अलका बागला ने “भारतीय ज्ञान परंपरा में रसायन” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान दिया, जिसकी श्रोताओं ने सराहना की। कोटा विश्वविद्यालय, कोटा की प्रो. नीलू चौहान ने नैनो पार्टिकल्स विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. बागला ने संगोष्ठियों की समसामयिक आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी विज्ञान जैसे जटिल विषयों को अपनी मातृभाषा में समझते हैं, तो उनका ज्ञान अधिक गहन और शीघ्र आत्मसात होता है। उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विज्ञान विषयों में स्थानीय भाषाओं में साहित्य की कमी है, जिसके कारण इस प्रकार की विचार-संगोष्ठियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दो दिवसीय यह संगोष्ठी एस. एस. जैन सुबोध कॉलेज, जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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