भास्कर न्यूज | गिरिडीह केएन बक्शी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में संविधान दिवस के अवसर पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षक-प्रशिक्षुओं ने भारतीय संविधान की मूल भावना, उसकी निर्माण प्रक्रिया तथा आधुनिक भारत में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था। सेमिनार की शुरुआत प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात सभी प्रशिक्षुओं ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संविधान सिर्फ कानून-पुस्तक नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है, जो नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का अधिकार प्रदान करता है।कार्यक्रम में संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मौलिक अधिकार–कर्तव्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व, शिक्षा के क्षेत्र में संविधान की भूमिका तथा शिक्षक की संवैधानिक जिम्मेदारियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। बी.एड. प्रशिक्षुओं ने सक्रिय सहभागिता दिखाते हुए सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने में शिक्षक की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।इसी अवसर पर सात दिवसीय सूक्ष्म शिक्षण कार्यशाला का समापन भी किया गया, जिसमें प्रश्न-कौशल, व्याख्या-कौशल, उदाहरण-कौशल, ब्लैकबोर्ड लेखन और कक्षा-प्रबंधन जैसे शिक्षण कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। प्राचार्य ने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण शिक्षक-प्रशिक्षण का हृदय है, जो प्रभावी शिक्षण और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाता है। प्रशासन ने कार्यक्रम को सफल बताते हुए ऐसे आयोजनों को शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण बताया।


