सनातन धर्म, हिंदू धर्म अध्यात्मवाद है। अध्यात्मवाद होने के कारण ही ये अजर, अमर और शाश्वत है। भारतीय संस्कृति, वेदों और उपनिषदों के महत्व को उजागर करते हुए द्वािरका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भारतीय सभ्यता हमेशा सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देती है। अहंकार मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देता है। संत, पंथ और ग्रंथ की रक्षा हम सबों को करनी चाहिए। सभी हिंदुओं को अपने धर्म का ज्ञान होना चाहिए। हमें अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए और धर्म के पथ पर चलते हुए आत्मा की शुद्धि करनी चाहिए। शंकराचार्य गुरुवार को हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अभिनंदन समारोह समिति के मुख्य संयोजक विनय सरावगी ने सपरिवार महाराज की चरण पादुका का पूजन कर किया। इसके बाद जगतगुरु शंकराचार्य का नागरिक अभिनंदन रांची के प्रमुख सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं द्वारा किया गया। अभिनंदन से पूर्व धर्म सभा हुई। इसमें स्वामी सदानंद सरस्वती ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। धर्म सभा में समिति के मुख्य संयोजक विनय सरावगी, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन, बसंत मित्तल, रवि शंकर शर्मा, मनोज बजाज, प्रमोद शाश्वत, संजय सर्राफ, केशव महतो कमलेश व अन्य धर्म प्रेमी उपस्थित थे।


