पठानकोट जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत, कटीली तारों की बाड़ को जीरो लाइन से 200 मीटर अंदर तक ले जाने की योजना है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर किसानों ने आपत्ति जताई है और इसे अपनी जमीन के लिए नुकसानदेह बताया है। पंजाब सरकार ने की बात बता दे कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है। इस चर्चा के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य उन किसानों को राहत देना है जिनकी कृषि भूमि दशकों से मौजूदा बाड़ के पार स्थित है। इन किसानों को हर साल अपनी फसलों को लेकर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किसानों के किया इनकार सीमावर्ती किसानों से बातचीत के दौरान उन्होंने 200 मीटर की दूरी पर बाड़ लगाने के प्रस्ताव को इनकार कर दिया। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें काफी नुकसान होगा। पठानकोट जिले में ही लगभग 2100 एकड़ कृषि भूमि वर्तमान में कटीली तारों के उस पार है। 150 मीटर के बीच की दूरी पर ही रखने की बात किसानों ने मांग की है कि यदि उनकी जमीनों को बचाना है, तो कटीली तारों को जीरो लाइन से 100 मीटर के बीच की दूरी पर ही रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि 200 मीटर की दूरी पर बाड़ लगाने से उनकी काफी उपजाऊ जमीन बाड़ के अंदर आ जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति होगी।


