भिंड जिले के लहचूरा गांव की 1300 बीघा जमीन, जिसकी कीमत करोड़ों में है, विवादों और सियासी रस्साकशी का अखाड़ा बन गई है। जमीन के कब्जे को लेकर गोली चलने से एक व्यक्ति की मौत ने इसे और गंभीर बना दिया। इस जमीन पर न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि बड़े राजनेताओं की भी नजर है। मुख्यमंत्री तक इसकी शिकायत पहुंची है, और कलेक्टर के हस्तक्षेप से रजिस्ट्रियां होल्ड पर हैं। पुरानी जमीन पर नया विवाद 1975 के रिकॉर्ड के अनुसार, लहचूरा गांव की यह जमीन सिंधिया राज परिवार के करीबी डीके जाधव और उनके वारिसों की थी। लेकिन 2017 में एक तहसीलदार ने जब जमीन का रिकॉर्ड खंगाला, तो पता चला कि असली मालिक विदेश में बस चुके थे और स्थानीय लोगों ने इस पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी थी। इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त का खेल शुरू हुआ, जिसमें राजनेताओं और रसूखदारों की भूमिका अहम रही। करोड़ों की जमीन लाखों में बिक रही मालनपुर इंडस्ट्रियल एरिया से सटी इस जमीन की बाजार में कीमत करोड़ों रुपए प्रति बीघा है, लेकिन इसे मात्र 2-3 लाख रुपए प्रति बीघा के हिसाब से खरीदा जा रहा है। अप्रैल 2024 में 133 बीघा जमीन की रजिस्ट्री देवेंद्र सिंह और नरेश सिंह सिकरवार के नाम हुई। सूत्र बताते हैं कि इस सौदे के पीछे मुरैना के एक प्रभावशाली नेता का हाथ था, जो पूरी जमीन खरीदकर अपने नजदीकी लोगों के नाम करवाना चाहते थे। नवंबर 2024 बेनामा, फिर मामला तूल पकड़ा बताया जा रहा है कि नवंबर 2024 को भिंड के एक पूर्व मंत्री ने अपने रिश्तेदारों के साथ 1033 बीघा जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की। लेकिन जाधव परिवार के वारिस भी सामने आ गए। इस दौरान पता चला कि महंगी जमीन को सस्ते में दिखाकर रजिस्ट्री कराई जा रही थी। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को गड़बड़ी की शिकायत मिली, और उन्होंने हस्तक्षेप कर रजिस्ट्री होल्ड करवा दी। सियासी बयानबाजी: जांच की मांग भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि इस विवाद की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है। इस बात की जानकारी मुझे मिली है। कुछ लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस नेता हेमंत कटारे ने आरोप लगाए है और स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सौदे में भिंड जिले के एक पूर्व मंत्री और उनके भाई शामिल हैं, जो जमीन को रिश्तेदारों के नाम करवाने की कोशिश कर रहे हैं। कलेक्टर के पत्र से बेनामा होल्ड हुए भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि अप्रैल और नवंबर 2024 में जमीन के सौदों की शिकायतें मिली थीं। उन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार को मामले की जानकारी मांगी, लेकिन जवाब न मिलने पर इसे होल्ड पर डाल दिया। उन्होंने कहा कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। लहचूरा की जमीन न केवल भिंड, बल्कि ग्वालियर और मुरैना के राजनेताओं और रसूखदारों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। जमीन पर कब्जा, सस्ते सौदे और सियासी दबाव ने इसे विवादित बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई से कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।


