भिंड के लहार के वार्ड क्रमांक 14 में स्थित संत रविदास सहकारी वितरण संस्था द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान पर गरीबों के राशन में भारी गड़बड़ी का आरोप सामने आया है। आरोप है कि दुकान संचालक ने पिछले दो माह से पात्र हितग्राहियों का गेहूं और चावल डकार लिया। इस संबंध में स्थानीय निवासियों द्वारा एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें राशन वितरण न होने की बात कही जा रही है। दुकान के भंडारण में राशन उपलब्ध ही नहीं
बताया गया कि सहकारी वितरण द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान पंजीयन क्रमांक 10/29 पर बीते दो महीनों से राशन का वितरण नहीं हुआ। वीडियो सामने आने के बाद जब दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की, तो जानकारी मिली कि दुकान के भंडारण में राशन उपलब्ध ही नहीं है। इसके बावजूद गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों को गुमराह कर उनसे अंगूठा लगवाकर यह भरोसा दिया जाता रहा कि राशन जल्द दिया जाएगा। आरोप है कि संचालक ने पीओसी मशीन पर अंगूठा लगवाकर राशन वितरण की रसीदें पहले ही बना लीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी कार्यालय में शिकायत भी की थी। मौखिक शिकायत सुनकर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही गलती से वंचित लोगों को उनका राशन मिल सका।
मामले की जांच के दौरान लहार कस्बे के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी से दो दिन तक संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार बोहित से बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था और वे जल्द जांच कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील मुदगल से चर्चा कर तथ्य जुटाएंगे। इसके बाद कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ने फोन पर संपर्क कर बताया कि उन्होंने वीडियो देख लिया है। लोगों का कहना है कि राशन नहीं मिला, लेकिन उनके पास अब तक कोई भी शिकायतकर्ता लिखित शिकायत लेकर नहीं पहुंचा है। ऐसे में जांच और कार्रवाई लिखित शिकायत मिलने के बाद ही की जाएगी। हर माह बीस से पच्चीस कुंटल गबन की बात सामने आई इस मामले में सूत्रों मिली जानकारी के मुताबिक गोदाम और मशीन के भंडार के स्टोक की जांच की जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी। बताया जाता है हर महीने बीस से पच्चीस कुंटल सरकारी राशन का गबन होता है। गरीबों की पर्ची थमाई जाती राशन नही दिया जाता। वही डेनिडा के निवासियों की पड़ताल में साक्ष्य सामने आ सकते है। इस मामले में प्रबंधक पवन कुमार नौरोजी का कहना है ये गलत आरोप है।


