सब्जी बेचकर मेहनत से जोड़ी गई हर पाई, और फिर एक ऐसी कंपनी का भरोसा जिसने उसे दोगुना करने का सपना दिखाया। भिंड जिले के गोलू राठौर जैसे न जाने कितने लोग एलजेसीसी कंपनी के धोखे के शिकार हो चुके हैं। करोड़ों का कारोबार करने वाली यह कंपनी अब ताले बंद दफ्तरों और फरार कर्मचारियों के साथ पीछे सिर्फ टूटे सपने छोड़ गई है। गोलू राठौर बताते हैं, “तीन साल से मेहनत की कमाई का पैसा एलजेसीसी कंपनी में जमा कर रहा था। मनीष नाम के एक एजेंट ने भरोसा दिलाया था कि पैसा कुछ ही समय में दोगुना हो जाएगा। अब तीन लाख रुपए जमा कर चुका हूं, लेकिन दफ्तर पर ताला लगा है, और कोई फोन नहीं उठा रहा।” एलजेसीसी कंपनी ने भिंड जिले में भिंड शहर में दो दफ्तर खोले। मेहगांव, मौ, दबोह, लहार के असवार कस्बा, रौन, मिहोना, फूप, गोरमी जैसे कस्बों में शाखाएं खोल रखी थीं। इन शाखाओं के मैनेजर मनीष देश पांडेय, बृजपाल सिंह राजावत, सूरज रैकवार, बृजेश शाक्य, कल्याण राठौर ने निवेशकों को धन दोगुना करने का लालच देकर पैसा जुटाया था। लेकिन पिछले दो महीने से सभी दफ्तर बंद हैं और कंपनी के एजेंट, मैनेजर व प्रमुख समीर अग्रवाल उर्फ सागा भूमिगत हो चुके हैं। दबोह के निवेशक पुलिस थाने के चक्कर काटकर थक गए हैं, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। थाना प्रभारी राजेश शर्मा का कहना है, “किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच चल रही है, और एजेंट से लेकर समीर अग्रवाल तक सभी को आरोपी बनाया जाएगा।” वहीं, भिंड एसपी असित यादव ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया है कि कंपनी से जुड़े लोगों की सूची तैयार की जाए और जल्दी कार्रवाई की जाए। अरबों लेकर फरार, लग्जरी में डूबे मैनेजर सूत्रों के अनुसार, पिछले 12 साल में एलजेसीसी कंपनी ने भिंड जिले में 80 करोड़ से अधिक का कारोबार किया। एजेंट और मैनेजर को मोटा कमीशन और लग्जरी गाड़ियां देकर टारगेट पूरा करवाया गया। कंपनी के मैनेजरों ने ग्वालियर, झांसी, उरई और कानपुर जैसे शहरों में फ्लैट, डुप्लेक्स और जमीन खरीदी। भिंड के एक मैनेजर ने कमीशन से 50 लाख कीमत की 10 बीघा जमीन खरीदी, वहीं दूसरे ऑफिस चलाने वाले मैनेजर ने ग्वालियर में फ्लैट और कंपनी से गिफ्ट में स्कॉर्पियो कार हासिल की। निवेशकों की उम्मीदें और कार्रवाई का इंतजार: भिंड जिले में जनता से ठगी कर करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले ये मैनेजर और एजेंट अब फरार हैं। लेकिन गोलू राठौर जैसे निवेशक हर दरवाजा खटखटाकर अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की उम्मीद में हैं। अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि उनकी उम्मीदें पूरी होती हैं या नहीं।


