भीलवाड़ा की कंपनी के खिलाफ सीबीआई केस:एसबीआई से लोन ले वापस चुकाने की बजाय पर्सनल खातों में डाले, 14.20 करोड़ की हेराफेरी

– भीलवाड़ा की शिवराम सिंथेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड व इसके डायरेक्टर प्रदीप कुमार सुरोलिया व प्रशांत सुरोलिया एफआईआर में नामजद सीबीआई जोधपुर में भीलवाड़ा की फर्म शिवराम सिंथेटिक्स और इसके डायरेक्टर प्रदीप कुमार सुरोलिया व प्रशांत सुरोलिया के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, जालसाजी, धोखाधड़ी तथा आपराधिक कदाचार की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इस संबंध में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भीलवाड़ा के रिजनल मैनेजर अविनाश पटौदी की ओर से दी गई रिपोर्ट में 3 दिसंबर 2024 तक ही 14.20 करोड़ रुपए की एनपीए राशि दर्शाते हुए बैंक के साथ धोखाधड़ी के लिए एक फर्म से दूसरी में ट्रांजेक्शन कर निदेशकों व परिवार के अन्य सदस्यों के खातों में डालने के तथ्य भी उपलब्ध कराए गए थे। अब सीबीआई इसकी तहकीकात में जुटी हुई है। वर्ष 2015 से शुरू हुआ लोन लेने का सिलसिला एसबीआई की ओर से सीबीआई को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार भीलवाड़ा रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित शिवराम सिंथेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड एक कपड़ा बुनाई इकाई है, जो शूटिंग कपड़ों के निर्माण में लगी है। कंपनी की भीलवाड़ा में दो फैक्ट्रियां हैं। इसके निदेशक प्रशांत सुरोलिया व प्रदीप कुमार सुरोलिया हैं, जो रिश्ते में भाई हैं। वर्ष 2015 में भीलवाड़ा इंदिरा मार्केट स्थित ई-एसबीबीजे (अब एसबीआई) से संपर्क किया। तब बैंक द्वारा कंपनी को 8.25 करोड़ रुपए की सीसी लिमिट और 50 लाख की एसएलसी (स्टैंडबाय लाइन ऑफ क्रेडिट) सहित कुल 8.75 करोड़ रुपए कार्यशील पूंजी, करघे व अन्य मशीनरी लगाने के लिए 6 नवंबर 2015 को ऋण स्वीकृत किया था। वर्ष 2016 से लगातार बढ़ती गई नकद ऋण सीमा – कंपनी के आग्रह पर मार्च 2016 में नकद ऋण सीमा में बढ़ाकर 10 करोड़ व एसएलसी के 50 लाख सहित कुछ 10.50 करोड़ रुपए कर दी गई। इसी तरह, अक्टूबर 2017 में कुल सीमा 11.50 करोड़ किए गए। इसी बीच दिसंबर 2018 में बैंक की जोनल क्रेडिट कमेटी ने बढ़ी हुई सीमा को रद्द भी किया। तब उधारकर्ता और गारंटरों ने जनवरी 2019 में ऋण दस्तावेजों का निष्पादन किया। फरवरी 2020 में यह सीमा बढ़कर 12.10 करोड़ तक पहुंच गई। कोरोना काल में 15.65 करोड़ तक पहुंचा कुल लोन अप्रैल 2020 में कोरोना काल के चलते कंपनी को आपातकालीन क्रेडिट सीमा के रूप में 1.15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। तत्पश्चात मई 2020 को 2.40 करोड़ रुपए गारंटीड आपातकालीन क्रेडिट लाइन (जीईसीएल-1) के रूप में स्वीकृत होने पर कुल एक्सपोजर बढ़कर 15.65 करोड़ तक जा पहुंचा। आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार मार्च से 31 अगस्त 2020 दौरान नकद ऋण में ब्याज की अदायगी रोक दी गई थी। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भी कंपनी के आग्रह पर गारंटीशुदा आपातकालीन क्रेडिट लाइन एक्सटेंशन-1 (GECL एक्सटेंशन-1) के तहत जनवरी 2022 में 1.15 करोड़ स्वीकृत किए गए। लेनदेन में गड़बड़ी, दूसरे खातों में करने लगे लेनदेन बैंक की ओर से विभिन्न श्रेणी में स्वीकृत ऋण राशि एकबारगी 15.02 करोड़ तक जा पहुंची। इसी बीच बैंक प्रबंधन को पता चला कि शिवराम सिंथेटिक्स के कर्ताधर्ता लेनदेन में गड़बड़ियां कर रहे हैं। इनमें देनदारों से वसूली में देरी, नकदी प्रवाह में गड़बड़ी, माल बिक्री से होने वाली आय को कैश क्रेडिट खाते के माध्यम से न भेजकर बड़े स्तर पर बैंक के साथ धांधली की जा रही है। जब तक बैंक के अधिकारी पूरी तरह संभल पाते, उससे पहले कंपनी का खाता 30 अप्रैल 2024 को एनपीए में बदल गया। इससे पहले बैंक की तय प्रक्रिया के अनुसार इस एनपीए खाते को हार्ड रिकवरी के लिए एसएएमबी-1 नई दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। बैंक की फ्रॉड आइडेंटिफिकेशन कमेटी की जांच में खुले कई राज शिवराम सिंथेटिक्स का खाता एनपीए होने के बाद बैंक की फ्रॉड आइडेंटिफिकेशन कमेटी (एफआईसी) ने कंपनी के निदेशकों, परिवार और इनसे जुड़ी अन्य कंपनियों के खातों की पड़ताल की। इसमें स्पष्ट साक्ष्य मिलने पर 15 मई 2024 को खाते को धोखाधड़ी घोषित कर दिया गया। इसी तरह, बैंक की ओर से फोरेंसिक ऑडिट भी करवाई गई। इन दोनों ही जांच में स्पष्ट हो गया कि सुरोलिया बंधुओं ने बैंक को धोखा देने के लिए अपने परिवार के लोगों और इनसे जुड़ी एक अन्य फर्म एमडी शूटिंग प्राइवेट लिमिटेड इत्यादि में फंड ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, शिवराम सिंथेटिक्स के खाते में आने वाली राशि को भी देनदारों से अन्य खातों में ली गई। इस तरह 30 अप्रैल 2023 तक एनपीए अकाउंट का शेष बकाया 14.20 करोड़ और उसके बाद से अब तक ब्याज व अन्य शुल्क कंपनी व उसके निदेशकों से वसूला जाना है।

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