भीलवाड़ा की MBA लेडी किसान, जैविक खेती से कमाए लाखों:कोरोना में पिता की कपड़ा इंडस्ट्री बंद हुई; वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर बेची सब्जियां

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला कपड़ों के बिजनेस के लिए जाना जाता है। भीलवाड़ा शहर की 28 साल की युवती ने मास्टर्स इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) करने के बाद पिता के कपड़ों के व्यापार में हाथ आजमाया। लेकिन कोरोना में कपड़ा इंडस्ट्री बंद हो गई। ऐसे में युवती ने जैविक खेती को बिजनेस की तरह किया और कामयाब हो गई। सब्जियां बेचने के लिए उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। ऑनलाइन ऑर्डर आने पर घर तक सब्जियां भिजवाई। उनके साथ कई किसान भी जुड़े हैं, जिनके ऑर्गेनिक प्रोडक्ट को वे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। साथ ही गाय के घी, वर्मी कंपोस्ट के काम से भी जुड़ी हैं। इससे उन्हें सालाना 25 लाख की कमाई हो रही है। युवा किसान पूर्वा जिंदल (28) के पिता ने भी कपड़े का बिजनेस छोड़ा और अब बेटी के साथ जैविक खेती में हाथ बंटा रहे हैं। म्हारे देस की खेती में आज बात भीलवाड़ा की किसान पूर्वा जिंदल की… मुंबई से किया एमबीए, पिता के साथ कपड़े का बिजनेस किया पूर्वा ने बताया- मैंने मुंबई से एक इंस्टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई की। इसके बाद साल 2017 में भीलवाड़ा आकर अपने पिता के पुश्तैनी कपड़ा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए काम करने लगी। साल 2020 में कोरोना काल आया। इससे कपड़ा इंडस्ट्री कुछ समय के लिए बंद हो गई। कोरोना के दौरान कई लोग हेल्थ व इम्यूनिटी को लेकर परेशान थे। कोरोना के दौरान मैंने प्रयोग के तौर पर कपड़े के बंद कारखाने में घर के लिए ऑर्गेनिक तरीके से सब्जियां उगाईं। इसके बाद तय कर लिया कि हमीरगढ़ में जैविक खेती करनी है। हमीरगढ़ में हमारी 10 एकड़ जमीन बंजर थी। इसे जुताई और गोबर की खाद से सही किया। इसके अलावा गायें भी रखना शुरू किया। गोबर और गोमूत्र से फसल के लिए खाद और दवाओं का निर्माण किया। अब उनके फार्म में 2 ग्रीनहाउस हैं, जिसमें काला गेहूं और सब्जियों की खेती होती है। सालाना 25 लाख की कमाई कर रही हैं। वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाई, गाय के गोबर का इस्तेमाल पूर्वा ने बताया- जैविक खेती में जरूरी है कि उपज में खाद के तौर पर पेस्टीसाइड, केमिकल और यूरिया का इस्तेमाल न किया जाए। ऐसे में मैंने खेती के साथ पशुपालन भी किया। मैंने गायें पालना शुरू किया और उनके गोबर और गोमूत्र को जैविक खाद के तौर पर इस्तेमाल किया। मैंने खेत में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट भी लगाई, जिसमें गाय के गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। खेत को उपजाऊ करने के लिए मैंने उसमें गहरी जुताई कराकर समतल कराया और फिर गोबर की खाद डालकर दो-तीन बार जुताई कराई। सिंचाई के लिए पूरे खेत में पाइप का जाल बिछाकर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया। गाय का घी 2000 रुपए किलो अपने ऑर्गेनिक फार्म पर पूर्वा गाय के मिल्क प्रोडक्ट का भी बिजनेस कर रही हैं। फर्म 1800 से 2000 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गाय का घी बेच रही है। पूर्वा ने बताया कि गायों का दूध हम नहीं बेचते। दूध से मक्खन तैयार करते हैं। इससे घी बनाया जाता है। इस घी की बहुत डिमांड है। पूर्वा ने बताया कि ऑनलाइन बिजनेस से मैंने कई किसानों को जोड़ लिया है। ये किसान जैविक खेती करते हैं। रसोई के सभी मसाले, तेल, घी से लेकर फल और सब्जियां हम ऑर्डर के हिसाब से एक दूसरे से शेयर कर लेते हैं। पूर्वा ने कहा- कई कंसल्टेंट्स हमें अच्छे प्रोडक्शन के लिए केमिकल के छिड़काव की सलाह देते हैं। लेकिन हम जीरो केमिकल की थीम पर काम कर रहे हैं। …. खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 350 किसान परिवारों वाला गांव, 200 करोड़ का टर्नओवर:सीकर का रसीदपुरा देशभर में पॉपुलर, मीठी प्याज से बनी पहचान राजस्थान के शेखावाटी में बसा है एक गांव, जिसकी पहचान बन गई है प्याज। रसीदपुरा- जिसे लोग प्यार से ‘प्याज वाला गांव’ कहते हैं। सीकर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रसीदपुरा गांव प्याज के लिए फेमस है। (पढ़ें पूरी खबर)

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