भीलवाड़ा के कोतवाली थाने में तैनात एक एएसआई को 50 हजार की रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट ने दोषी मानते हुए ढाई साल का कठोर कारावास और 3 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। इस फैसले को आने में करीब 12 साल का समय लगा लेकिन पुलिस महकमे में ट्रैपिंग के मामले में इसे सख्त सजा माना जा रहा है। यह था मामला एडवोकेट ललिता शर्मा ने 18 सितंबर 2013 में भीलवाड़ा एसीबी सैकंड में परिवाद दिया था कि उनके क्लाइंट नवनीत अटल के खिलाफ कोतवाली थाने में 3-4 मामले दर्ज हुए थे।इसकी जांच में मदद करने और मारपीट नहीं करने की एवज में सिटी कोतवाली थाने के एएसआई सहाड़ा हाल आजादनगर निवासी लक्ष्मीनारायण शर्मा ने 3 लाख रुपए की मांग की। एक लाख पहले लिए फिर 50 हजार ओर मांगे एक लाख रुपए पहले ले चुके थे और 50 हजार रुपए और मांग रहे थे।इस पर एसीबी ने एएसआई लक्ष्मीनारायण को बापूनगर में एडवोकेट के घर पर 50 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। कोर्ट ने दोषी माना ओर सजा सुनाई विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश अग्रवाल ने तत्कालीन एएसआई लक्ष्मीनारायण पर आरोप प्रमाणित करने के लिए कोर्ट गवाह और डॉक्युमेंट्स पेश किए। इस पर विशिष्ट कोर्ट ने एएसआई को दोषी मानते हुए ढाई साल का कठोर कारावास और 3 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया है।


