मौसम परिवर्तन और सर्दी बढ़ने के साथ ही भक्तों ने जैसे खुद को सर्दी से बचाया है अपने खान पान में बदलाव किया है ठीक उसी प्रकार अपने आराध्य ठाकुर जी को भी ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे है।शरद ऋतु ओर सर्दी को देखते हुए ठाकुर जी के आहार,व्यवहार,दैनिक दिनचर्या,भोग,इत्र सेवा और पोशाक में भी बदलाव किया गया है साथ ही ठंड से बचाने ओर गर्माहट के लिए ठाकुर जी के पास सुबह-शाम अंगीठी ( सिघड़ी ) लगाई जा रही है। सर्दी बढ़ने के साथ ही विशेष सेवा शुरू मंदिर के पुजारी कल्याण शर्मा ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ ही भगवान की विशेष रूप से सेवा पूजा की जा रही है।पौष महीने में ठंड का असर तेज रहता है इसके चलते ठाकुर जी की दैनिक दिनचर्या में शीत ऋतु के अनुसार परिवर्तन किया गया है। प्रातः काल जब ठाकुर जी का उत्थापन होता है तो ठाकुर जी के स्नान के लिए जल गुनगुना गर्म करके ठाकुर जी को स्नान करवाया जाता है। इत्र और पोशाक में बदलाव ठाकुर जी की इत्र सेवा की जाती है ओर गुलाब, मोगरा की जगह अब हिना ओर केसर के इत्र का लेपन किया जाता है ताकि ठाकुर जी का शरीर गर्म रहे।ठाकुर जी को पहनाई जाने वाली पोशाक में परिवर्तन हुआ है जहां पहले कॉटन की पोशाक पहनाई जा रही थी अब उसकी जगह हाथ से बनी ऊनी पोशाक ओर वेलवेट की गर्म पोशाक ठाकुर जी को धारण करवाई जा रही है आहार-विहार ओर भोग भी बदला ठाकुर जी के आहार विहार और भोग में परिवर्तन किया गया प्रात: काल ठाकुर जी को बाल भोग लगता है उसमे हलवा,गाजर का हलवा, तिल्ली के व्यंजन,पकौड़ी ओर खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। ठाकुर जी के राजभोग में जहां पहले ठंडा आहार होता था, चांवल का भोग लगता था अब चांवल की जगह घाट, लापसी, बाजरे का खिचड़ा आदि सब आहार में शामिल किया है। सर्दी से बचाने के लिए अंगीठी लगाई सांयकाल और प्रातः काल ठाकुर जी के लिए अंगीठी ( सिगड़ी ) शीत से बचाव के लिए लगाई जा रही है और रात्रि में ठाकुर जी का जब शयन होता है तो उन्हें दोवड,रजाई,ऊनी कंबल ओढ़ाई जाती है। इस प्रकार सेवा पूजा में बदलाव किए गए हैं। ठन्डे मौसम में भी भक्ति में कोई कमी नहीं शहर में मौसम का मिजाज ठंडा है,सर्दी के तेवर भी तेज होने लगे है लेकिन तेज सर्दी के बीच भी भक्तों की भगवान के प्रति आस्था में कोई कमी नहीं है।अल सुबह मंगला से लेकर रात को शयन आरती के समय तक बड़ी संख्या में भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं और इस सेवा भाव के साथ अपने आराध्य की आराधना में लीन हैं ।


