राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के आदेशानुसार भीलवाड़ा कोर्ट परिसर में इस साल की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू हो गई है। राजीनामे के लिए चिन्हित प्रकरणों के निस्तारण हेतु कुल 20 बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों में न्यायिक अधिकारी, राजस्व अधिकारी और अनुभवी वकील सदस्य पक्षकारों को समझाइश देकर मामलों का समाधान कर रहे हैं। जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन ने बताया कि इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में 19500 प्रकरणों को चिन्हित कर रखा गया है। उन्होंने बताया कि पिछली बार राजस्थान को पांचवां स्थान मिला था और इस बार प्रयास है कि जनता की भागीदारी से यह स्थान और बेहतर हो। सिविल के मामलों पर रहेगा फोकस राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों के सिविल और फौजदारी मामलों के साथ-साथ राजस्व प्रकरणों का भी निपटारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आमजन को त्वरित और सरल न्याय का फायदा देना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। आपसी समझाइश से विवाद सुलझाने की प्रक्रिया प्राधिकरण के सचिव विशाल भार्गव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य सभी प्रकार के मुकदमों को आपसी बातचीत और समझाइश के जरिए सुलझाया जा रहा है। मुकदमा पूर्व रखे गए बैंक, बिजली और अन्य संस्थाओं से जुड़े मामलों में मूल राशि से भी कम पर तथा ब्याज माफ कर हाथों-हाथ फैसले किए जा रहे हैं। दोनों पक्षों की सहमति से ही फैसला सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का माहौल सामान्य न्यायालय जैसा नहीं होता, बल्कि यह अधिक सहज और अनौपचारिक रहता है। यहां दोनों पक्ष अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। किसी पर भी राजीनामा थोपा नहीं जाता और केवल दोनों पक्षों की स्वैच्छिक सहमति होने पर ही आदेश पारित किया जाता है।


