भूकंप का नया नक्शा, जयपुर डेंजर जोन में:2 और शहरों में खतरा, पुरानी बिल्डिंगों के लिए खतरनाक 5 से 6 रिक्टर स्केल के झटके

जयपुर भूकंप के लिहाज से हाई रिस्क जोन में है। जयपुर के अलावा अलवर-भिवाड़ी भी हाई रिस्क जोन में हैं। हाई रिस्क जोन का मतलब 5 से 6 रिक्टर स्केल के झटके आ सकते हैं। जो पुरानी बिल्डिंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाल ही में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडड्‌र्स ने देश का नया भूकंप जोखिम नक्शा जारी किया है। इसमें जयपुर, भिवाड़ी और अलवर को ज्यादा खतरे वाले जोन 4 में डाला गया है। इससे पहले साल 2016 तक जयपुर माइल्ड डैमेज रिस्क जोन 2 में शामिल था। स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए क्या है हाई रिस्क जोन में आने के मायने… जयपुर, भिवाड़ी और अलवर को क्यों माना हाई रिस्क जोन नए मैप में इस बार कई शहरों के जोन को अपग्रेड किया गया है। इससे पहले कई ऐसे शहर जो कम जोखिम में समझे जाते थे, अब अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की सूची में आ गए हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडडर्स ने इस मैप को PSHA यानी प्रोबैबिलिस्टिक सीस्मिक हैज़र्ड असेसमेंट मॉडल के आधार पर तैयार किया है। साल 2016 तक बीकानेर जोन 3, अजमेर, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जोन 2 में थे। एक्सपर्ट व्यू : नई बिल्डिंगों की बसावटों में रखना होगा ख्याल स्ट्रक्चरल इंजिनियर सुनील गोयल ने बताया कि पुरानी बिल्डिंगों को भूकंप के झटकों को झेलने के लिए डिजाइन ही नहीं किया जाता था। अब नए सिरे से तैयारी करनी होगी। फिलहाल सिर्फ एक सर्टिफिकेट से बिल्डिंग को सेफ-अनसेफ बता दिया जाता है, जबकि जेडीए और अन्य एजेंसियों को सभी प्रोजेक्ट की ड्राइंग और डिजाइन फाइल की जांच करनी चाहिए। आर्किटेक्ट्स को भी अपनी प्लानिंग में स्ट्रक्चरल सिस्टम को फॉलो करना होगा। इसके अलावा फ्लैट खरीदने वालों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि कार खरीदते वक्त हम उसके लुक के बजाय सेफ्टी फीचर्स को ज्यादा महत्व दें। नए मैप का मतलब भूकंप आने की आशंका बढ़ना नहीं भू वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज पंडित का कहना है कि नए मैप का मतलब ये नहीं है कि अचानक खतरा बढ़ गया है या भूकंप आने की आशंका बढ़ गई है। इसका मतलब है कि किस क्षेत्र में कितना भूकंप आ सकता है। भूकंप आने पर त्रासदी या विनाश को कितना कम किया जा सकता है। पुराना मैप पूर्व में आए भूकंप के आधार पर बनाया गया था। अब वैज्ञानिक तरीके से नया मैप तैयार किया गया है। ऐसे में ये नया कोड भूकंप की तैयारी को लेकर है। प्रोफेसर एचएस शर्मा ने बताया कि जयपुर पहले जोन 2 में आता था। अब दिल्ली एनसीआर और जयपुर को एक ही जोन में शामिल कर लिया गया है। जोन 4 में भूकंप की इंटेसिटी बढ़ती है। ऐसे में आने वाले समय में बिल्डिंग के स्ट्रक्चर में ध्यान रखने की जरूरत है। ताकि तीव्र भूकंप आने पर जनधन की हानि कम से कम की जा सके। क्या है नया भूकंप नक्शा? BIS ने नया नक्शा IS 1893 (Part 1): 2025 कोड के तहत जारी किया है, जो जनवरी 2025 से लागू है। अब देश में बिल्डिंग्‍स, ब्रिज, हाईवे और बड़े प्रोजेक्ट इसी नए भूकंप नियमों के अनुसार बनाए जाएंगे। यह नक्शा पुराने 2002 के नक्शे की जगह ले रहा है। यह नक्शा कितना भरोसेमंद है? यह अब तक का सबसे वैज्ञानिक और सटीक नक्शा कहा जा रहा है। इसमें GPS डेटा, सैटेलाइट स्टडी, फॉल्ट लाइन, भूकंप इतिहास, लाखों सिमुलेशन शामिल हैं जापान और न्यूजीलैंड जैसे देशों की तकनीक अपनाई गई है। क्या इससे भूकंप में जान बच सकेगी? विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों से भूकंप में 80-90% नुकसान कम किया जा सकता है। नई बिल्डिंग्‍स गिरेंगी नहीं, झटके सहने लायक होंगी। पुरानी बिल्डिंग्‍स को भी अपडेट करना जरूरी है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *