राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम(रीको) क्षेत्रों में 460 ट्यूबवैल से बिना अनुमति रोज 6.90 करोड़ लीटर भूजल का दोहन करने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण(एनजीटी) की केंद्रीय पीठ, भोपाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण(सीजीडब्ल्यूए) सहित राज्य के 17 जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत शपथ पत्र देने के आदेश दिए हैं। साथ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तलब किया है। एनजीटी ने कहा है कि बीकानेर, अलवर, सीकर, उदयपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, चूरू, सिरोही, श्रीगंगानगर, जालौर, झुंझुनूं, कोटा, जयपुर, पाली, करौली, राजसमंद एवं सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल होगा। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अनुपालन न होने पर संबंधित जिला कलेक्टरों को स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकरण के समक्ष उपस्थित होना होगा। एनजीटी ने स्पष्ट कहा है कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति के बिना रीको औद्योगिक और कर्मचारियों/श्रमिकों के घरेलू उपयोग के लिए भूजल की आपूर्ति नहीं कर सकता। यह सर्वोच्च न्यायालय के 24 मार्च 2025 के आदेश का खुला उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि अनुमति के बिना भूजल आपूर्ति अवैध है। इसके बावजूद रीको ने भूजल का दोहन जारी रखा, जो पर्यावरणीय कानूनों की अवहेलना और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से लाभ कमाने का गंभीर उदाहरण है। एनजीटी ने सीजीडब्ल्यूए की अनुपालन रिपोर्ट को अधूरी और असंतोषजनक करार देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में कितना भूजल निकाला गया, कितना शुल्क व पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली गई और उस धन से भूजल रिचार्ज पर क्या वास्तविक कार्य हुआ, इसका कोई ठोस और तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि भूजल स्तर में वास्तविक सुधार का प्रमाण अपेक्षित है। एनजीटी ने राज्य सरकारों और सीजीडब्ल्यूए को निर्देश दिया है कि अतिदोहित और संकटग्रस्त क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से भूजल रिचार्ज कार्य तत्काल सुनिश्चित किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा बनी रहे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। रीको पर 276 करोड़ की पेनल्टी लगी थी अवैध रूप से भूजल का दोहन करने पर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने रीको पर 276 करोड़ 87 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई थी, जिस पर रीको ने कोर्ट से स्टे ले रखा है। क्या था मामला केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति के बिना प्रदेश के रीको क्षेत्रों में अवैध रूप से भूजल का दोहन करने पर सर्वोदय बस्ती निवासी ताहिर हुसैन ने जल शक्ति मंत्रालय व अन्य के खिलाफ 2024 में एनजीटी की केंद्रीय पीठ भोपाल के समक्ष आवेदन किया था। आरोप है कि राजस्थान के कुल 409 रीको क्षेत्रों में से 160 में करीब 460 ट्यूबवैल 2017 से अवैध रूप से संचालित हैं। इससे सरकार को तो राजस्व का नुकसान हुआ ही है साथ ही पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है। रीको औद्योगिक क्षेत्रों में बिना अनुमति भूजल दोहन पर एनजीटी सख्त रीको ने 160 औद्योगिक क्षेत्रों में 460 ट्यूबवैल से घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन 2017 में दिए थे। इसके लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति ही नहीं ली गई। नौ साल से रोज 6.90 करोड़ लीटर भूजल दोहन हो रहा है। इससे सरकार को 1500 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। एक दीवानी अपील पर सुप्रीम कोर्ट के 24 मार्च 2025 के एक आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति बिना रीको अपने औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित ट्यूबवैल से श्रमिकों और कर्मचारियों के घरेलू उपयोग के लिए भी भूजल की आपूर्ति नहीं कर सकता।


