विकास परियोजनाओं में किसानों, भूमिस्वामियों को मिलने वाले भू अर्जन मुआवजे के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार अब इस राशि में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इसको लेकर गणना फैक्टर निर्धारण समिति का गठन किया गया है। जिसमें मंत्री राकेश सिंह, तुलसी सिलावट और चैतन्य काश्यप शामिल हैं। समिति द्वारा किसानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, जन-प्रतिनिधियों, किसान संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सहित विभिन्न संगठनों एवं जन-मानस के सुझावों को सुना जाएगा। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिले लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि विकास के साथ उन किसानों एवं आम नागरिकों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाना है, जिनकी भूमि विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाई जा रही है। इसके लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया ऐसी हो कि प्रभावित परिवारों को उचित, न्यायसंगत और बेहतर मुआवजा प्राप्त हो सके। मंत्री सिंह ने मंत्रालय में भू-अर्जन मुआवजा गणना फैक्टर निर्धारण समिति की बैठक में यह बात कही। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप उपस्थित रहे। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास, अधोसंरचना निर्माण और अन्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भूमि की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। यह भूमि शासकीय भी हो सकती है और निजी भी, जिसमें किसान एवं सामान्य नागरिक शामिल होते हैं। भूमि अर्जन के दौरान अधोसंरचना से जुड़े कार्यों में मुआवजा राशि की गणना में किसी भी प्रकार की विसंगति न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में भू-अर्जन मुआवजा गणना फैक्टर निर्धारण के लिये मंत्री समिति का गठन किया गया है। जन-मानस के सुझावों को सुना जाएगा मंत्री सिंह ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में मुआवजा गणना का फैक्टर-1 निर्धारित है। इस फैक्टर को बढ़ाने की संभावना पर विचार करने और सभी पक्षों की राय प्राप्त करने के उद्देश्य से समिति गठित की गई है। मंत्री सिंह ने कहा कि समिति द्वारा किसानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, जन-प्रतिनिधियों, किसान संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सहित विभिन्न संगठनों एवं जन-मानस के सुझावों को सुना जाएगा। बुधवार को मंत्रालय में समिति की बैठक में सभी हितधारकों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सुझाव प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। इसके लिए psrevenue@mp.gov.in ई-मेल आईडी भी जारी की गई है, जिस पर कोई भी नागरिक अपने सुझाव भेज सकता है। सुझावों का व्यवहारिक एवं तथ्यात्मक अध्ययन किया जाएगा, जिसके पश्चात समिति आगे की आवश्यक कार्यवाही करेगी।


