भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की बेंच करेगी सुनवाई:3 हफ्ते में खुले कोर्ट में सार्वजनिक होगी ASI रिपोर्ट; सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

धार भोजशाला से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर) के 11 मार्च 2024 के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील का निपटारा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित रिट याचिका (क्रमांक 10497/2022) की सुनवाई अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी। इस बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट आगामी तीन सप्ताह में खुले न्यायालय में खोली जाएगी। रिपोर्ट की प्रतियां दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी करने योग्य नहीं पाया जाता है, तो पक्षकारों को विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं की उपस्थिति में उसका निरीक्षण करने की अनुमति दी जाएगी।
आपत्ति के लिए मिलेंगे 2 सप्ताह, तय होगा धार्मिक स्वरूप रिपोर्ट पर आपत्तियां या सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दोनों पक्षों को दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई के दौरान सभी कानूनी तर्कों पर विचार करेगा। याचिकाकर्ता आशीष गोयल (धार) ने बताया कि एएसआई द्वारा 98 दिनों तक किए गए सर्वे के आधार पर अब हाईकोर्ट भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगा। ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा, 2003 का आदेश लागू रहेगा न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिट याचिका के अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना और स्वरूप में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। एएसआई के महानिदेशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी आदेश यथावत लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। ये हैं पक्षकार यह मामला मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी बनाम हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस से संबंधित है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखा।

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