धार में 23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने के कारण भोजशाला को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस दिन हिंदू समाज सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति मांग रहा है, जबकि मुस्लिम समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज की अनुमति की मांग कर रहा है। दोनों पक्षों की मांगों के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसी बीच, 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई से पहले राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। लोगों से संयम की अपील की
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार और जिला प्रशासन से संयम और संतुलन बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा वर्ष 2003, 2013 और 2016 में जारी आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि जब भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ते हैं, तब पूजा और नमाज दोनों के लिए समय निर्धारण की व्यवस्था पहले से तय है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, पूर्व में बसंत पंचमी पर पूजा सूर्योदय से दोपहर तक और शाम 3:30 बजे से सूर्यास्त तक कराई जाती रही है। वहीं, दोपहर 1 से 3 बजे का समय जुमे की नमाज के लिए निर्धारित रहा है। उन्होंने प्रशासन से इन आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने दोनों समुदायों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की भी अपील की है। हिंदू फ्रंट ने मांगी पूरे दिन पूजा की अनुमति
दूसरी ओर, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्बाध पूजा की अनुमति को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस याचिका पर 22 जनवरी को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 23 जनवरी को भोजशाला में पूजा की अंतिम व्यवस्था तय करेगा।


