भोपाल के पूर्व वरिष्ठ जिला पंजीयक पर ईडी का शिकंजा:सिंगरौली में 200 करोड़ की रिश्वत मांगने वाले पूर्व सीनियर मैनजर के विरुद्ध कोर्ट में अभियोजन शिकायत

भोपाल ईडी ने दो अलग-अलग मामलों में भोपाल के पूर्व वरिष्ठ जिला पंजीयक सोबरान सिंह अपोरिया और पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) जयंत परियोजना सिंगरौली शैलेंद्र पसारी को प्री काग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। साथ ही इनके विरुद्ध कोर्ट में अभियोजन शिकायत (पीसी) दर्ज कराकर जांच शुरू की है। पसारी पर बिलों के भुगतान के बदले 200 करोड़ की रिश्वत मांगने और अपोरिया के खिलाफ ईमानदार बनकर परिजनों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में कार्यवाही की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने शैलेंद्र पसारी के खिलाफ पीएमएलए के प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज की है। यह अभियोग शिकायत 9 जनवरी को विशेष पीएमएलए न्यायालय, जबलपुर के समक्ष दर्ज की गई थी। आरोपी के खिलाफ पूर्व संज्ञान सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। शैलेंद्र पसारी के खिलाफ ईडी ने जबलपुर स्थित सीबीआई और एसीबी द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। 200 करोड़ की रिश्वत मांगी, दस हजार लेते हुआ था गिरफ्तार
पहली एफआईआर 8 सितंबर 2018 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के साथ-साथ 13(1)(ए) के अंतर्गत दर्ज की गई थी जिसमें शैलेंद्र पसारी, तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) जयंत परियोजना, सिंगरौली को 200 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगते और 10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। पसारी को लंबित बिलों के भुगतान के लिए 10,000 रुपए का भुगतान किया गया था। इसके बाद सीबीआई द्वारा उनके परिसर में सर्चिंग की गई। पसारी के आवास, बैंक लॉकरों और कार्यालय से 72 लाख 97 हजार 200 रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की गई। पसारी के खिलाफ दूसरी एफआईआर में अनुपात हीन संपत्ति का केस
पसारी के विरुद्ध दूसरी एफआईआर 22 सितंबर 2018 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ-साथ 13(1)(बी) के तहत अनुपातहीन संपत्ति के लिए दर्ज की गई, जिसमें सीबीआई ने आरोप लगाया कि पसारी और उनके परिवार के सदस्यों के पास 1 जनवरी 2014 से 8 सितंबर 2018 की अवधि के दौरान 1.30 करोड़ रुपए (124.12% अनुपातहीन) की संपत्ति थी। ईडी ने अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) का आकलन 1,30,94,155 रुपए किया है, जिसमें सीबीआई द्वारा जब्त की गई 72,97,200 रुपए की नकदी (कानून प्रवर्तन एजेंसी की हिरासत में) और 57,96,955 रुपए की संपत्ति शामिल है, जिसे अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। न्याय निर्णय प्राधिकारी, पीएमएलए, नई दिल्ली ने 14 अगस्त 2025 के आदेश द्वारा इस कार्यवाही की पुष्टि की। ईडी ने सीबीआई द्वारा जब्त की गई नकदी के साथ-साथ कुर्क की गई संपत्तियों की जब्ती के लिए अपील की है। ईडी की जांच से पता चला है कि शैलेंद्र पसारी ने जानबूझकर अपराध की आय अर्जित की, उसे अपने पास रखा, छिपाया और उसका इस्तेमाल किया और अवैध नकदी को कई पारिवारिक बैंक खातों के माध्यम से भेजकर और उसे वित्तीय साधनों और संपत्तियों में परिवर्तित करके उसे बेदाग दिखाया। अपोरिया के विरुद्ध कोर्ट में पीसी, सुनवाई को लिए ईडी ने थमाया नोटिस
उधर ल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय ने भोपाल में वरिष्ठ जिला पंजीयक रहे सोबरान सिंह अपोरिया के खिलाफ एक्ट के अंतर्गत अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज कराई है। अपोरिया के विरुद्ध विशेष पीएमएलए न्यायालय भोपाल में 19 जनवरी को यह शिकायत दर्ज की गई है। इसके साथ ही अपोरिया के खिलाफ पूर्व संज्ञान (प्री काग्निजेंस) सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। ईडी ने सोबरान सिंह अपोरिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (ई) पठित 13 (2) में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। इसके अनुसार सोबरान सिंह अपोरिया ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी ज्ञात और वैध आय के स्रोतों से काफी अधिक संपत्ति अर्जित की। ईडी के अनुसार काली कमाई से मोटी रकम जुटाने का काम अपोरिया ने किया है।
अपोरिया ने जानबूझकर ऐसी धनराशि को अपने पास रखने, छिपाने और उसका आनंद लेने के लिए एक मनी लॉन्ड्रिंग सिस्टम तैयार कर उसे लागू किया जबकि वह स्वयं को इसके दिखावटी स्वामित्व से दूर रखने का प्रयास कर रहा था। अपोरिया ने जानबूझकर अपराध से प्राप्त धनराशि को अर्जित किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसका उपयोग किया और उसे बेदाग दिखाने के लिए अवैध नकदी को परिवार के कई बैंक खातों के माध्यम से भेजा और उसे वित्तीय साधनों और संपत्तियों में परिवर्तित किया।

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