भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समि​ट:जापान बना कंट्री पार्टनर, मप्र में कर सकता है बड़ा निवेश

मप्र में पहली बार जापान निवेश कर सकता है। भोपाल में 24-25 फरवरी को आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में जापान कंट्री पार्टनर के रूप में भाग ले रहा है। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए 27 जनवरी से 1 फरवरी तक जापान की यात्रा पर रहेंगे। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जापान के कंट्री पार्टनर बनने से मप्र में बड़ा निवेश आएगा। यह बात उन्होंने शहडोल में 16 जनवरी को होने वाली रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के पहले आयोजित बैठक में बताई। उन्होंने ग्लोबल इंवेस्टर समिट को लेकर कहा कि समिट से पहले हम 11 विभागों को निवेश नीतियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दे चुके हैं। वहीं 21 निवेश नीतियों पर कार्य चल रहा है। मछुआ समृद्ध योजना को दो साल का मिला एक्सटेंशन: कैबिनेट में केंद्र पोषित सीएम मछुआ समृद्धि योजना को अगले दो साल के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। इस योजना में मप्र सरकार को सालाना 100 करोड़ का राज्य अंश देना होता है, तभी केंद्र से अनुदान राशि मिलती है। वहीं जिलों में पुलिस बैंड की स्थापना के लिए 932 पद स्वीकृत कर दिए गए। इनमें 10 निरीक्षक, 38 उप निरीक्षक, 72 सहायक उप निरीक्षक, 170 प्रधान आरक्षक और 642 आरक्षक बैंड के पद शामिल है। देवी अहिल्या बाई होलकर के 300वें जयंती वर्ष में मंत्रि-परिषद की अगली महेश्वर में होगी। सरकारी दफ्तरों का ​भविष्य में बिजली खर्च घटेगा मप्र की सभी सरकारी इमारतों की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे और इस साल इस काम को मिशन मोड पर पूरा किया जाएगा। बुधवार को हुई केबिनेट बैठक में सीएम डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने इसको मंजूरी दी। यह काम केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत किया जाएगा। इसमें जिला स्तर पर 20 किलोवॉट और उससे अधिक क्षमता वाले सरकारी भवनों पर ऊर्जा विकास निगम सोलर रूफ टॉप संयंत्र स्थापित करेगा। दो मोड पर काम होगा। इसमें एग्रीगेट कर निविदा के जरिए रेस्को (रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी) मॉडल या कैपेक्स (केपिटल एक्सपेंडिचर) मोड में काम किया जाएगा। रेस्को मोड में प्राइवेट कंपनी अपने खर्च पर सोलर संयंत्र लगाएगी और बिजली बनाकर सरकार को बेचेगी। जबकि कैपेक्स मॉडल में सरकारी धन का निवेश कर सोलर संयंत्र लगाकर अपनी जरूरत की बिजली सरकारी दफ्तर बनाएंगे, जिससे भविष्य में बिजली पर होने वाले खर्च घटाया जा सकेगा। आमदनी के लिए दूर जाना पड़ता है, इसलिए केंद्रीय करों में 8.7% हिस्सेदारी की बात रखेगा मप्र 16वें वित्त आयोग को लेकर मप्र सरकार ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। आयोग 6-7 मार्च को मप्र आ रहा है, इसे देखते हुए मुख्यमंत्री के सामने बुधवार को इसका प्रेजेंटेशन किया गया। पांच सेक्टरों ज्यादा फॉरेस्ट, जनजातीय जनसंख्या और उनके विकास से जुड़ी योजनाएं, अधोसंरचना क्षेत्र, बेहतर आर्थिक प्रबंधन और अच्छे निवेश के साथ मप्र इस बात पर भी फोकस रखने वाला है, जिसमें बताया जाएगा कि मप्र के लोगों को आमदनी के लिए ज्यादा दूरी (इनकम डिस्टेंस) तय करनी पड़ती है। इन्हीं आधारों पर मप्र इस बार केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को करीब एक प्रतिशत बढ़ाकर डिमांड रखेगा। पंद्रहवें वित्त आयोग में मप्र को 7.8% हिस्सा मिला, जबकि अब वह 8.7% हिस्से की मांग करेगा। यह कुल 42% केंद्रीय करों से मिलने वाली राशि होगी। कैबिनेट बैठक में जब तैयारियों का प्रेजेंटेशन हुआ तो सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मप्र के जो भी मजबूत पक्ष हैं, वित्त आयोग के सामने उसे तर्कों व दमदारी के साथ रखा जाए।

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