पुलिस ने केवल सख्ती नहीं, बल्कि सुधार और सामाजिक पुनर्वास की नीति का भी ध्यान रखा है। शहर के गुंडे और निगरानी बदमाशों को पुलिस ने माफी दी है। यह वे हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों में किसी भी तरह का अपराध नहीं किया और अपने काम-धंधे से जुड़े रहे। भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के चारों जोन में नए 202 गुंडा और 25 निगरानी बदमाश लिस्ट में जोड़े गए हैं। इनमें से 74 गुंडा व निगरानी बदमाशों के नाम हटाए गए हैं। अभियान के अंतर्गत ऐसे गुंडा एवं निगरानी बदमाश, जो लंबे समय से निष्क्रिय थे, जिनके खिलाफ कई वर्षों से कोई आपराधिक गतिविधि दर्ज नहीं हुई, उन्हें गुंडा एवं निगरानी सूची से हटाया गया है। इसके साथ ही जिन गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की मृत्यु हो चुकी है, उन्हें भी सूची से हटाया गया है। इन गुंडा और निगरानी बदमाशों द्वारा मजदूरी, व्यापार या निजी नौकरी जैसे कामों से अपनी आजीविका चलाई जा रही है। इसके चलते इन्हें सुधार की श्रेणी में मानते हुए राहत दी गई। चारों जोन में गुंडा-निगरानी बदमाशों की सूची में बदलाव किसी दबाव या सिफारिश में नहीं दी गई है यह राहत
पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा का स्पष्ट कहना है कि यह राहत किसी सिफारिश या दबाव में नहीं दी गई है। यह नीति बताती है कि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सुधार और समाज की मुख्यधारा में लौटने वालों को भी मौका दिया जा रहा है। डीसीपी जोन-4 मयूर खंडेलवाल का कहना है कि 1 नवंबर से चल रहे अभियान के अंतर्गत वर्तमान में सक्रिय 80 गुंडों और 06 बदमाशों को सूची में जोड़ा गया है।


