झाबुआ में रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 की जानकारी देने के लिए भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया ने बजट को ‘विकसित भारत’ के संकल्प का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि हर नागरिक के सुनहरे भविष्य की गारंटी है। इस दौरान सांसद अनिता नागर सिंह चौहान और प्रदेश मंत्री संगीता सोनी भी मौजूद रहीं। कौशल विकास से बालिकाओं को मिलेगा स्वरोजगार मंत्री निर्मला भूरिया ने बजट में युवाओं और बालिकाओं के लिए किए गए प्रावधानों पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा के साथ-साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि सभी को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए बजट में कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। बालिकाओं को ऐसे हुनर सिखाए जाएंगे जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। युवाओं के लिए ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम स्थायी समिति’ के गठन की घोषणा को उन्होंने क्रांतिकारी कदम बताया। सांसद बोलीं- नारी शक्ति सिर्फ लाभार्थी नहीं, अब ‘विकास का इंजन’ सांसद अनिता चौहान ने बजट को महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि अब महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत (नारी शक्ति) हैं। बजट में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक भागीदारी और तकनीकी नेतृत्व तक विस्तार दिया गया है। साथ ही, स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.5 लाख केयरगिवर्स और 1 लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य और विदेश यात्रा में बड़ी राहत मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि बजट में आम आदमी को मिली राहतों का जिक्र करते हुए नेताओं ने बताया कि कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क को शून्य या बेहद कम कर दिया गया है, जिससे इलाज सस्ता होगा। स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर बायोफार्मा और आयुष केंद्रों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। विदेश यात्रा और पढ़ाई हुई सस्ती मंत्री ने बताया कि विदेश में पढ़ाई कर रहे बच्चों और विदेश यात्रा पर जाने वालों के लिए भी खुशखबरी है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत लगने वाले टीसीएस (TCS) को 5% से घटाकर मात्र 2% कर दिया गया है। इसके अलावा, कर दाताओं को अब कम या शून्य टीडीएस प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, जिससे ‘इज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा मिलेगा।


