मंत्री विजय शाह ने कहा -:जो लाड़ली बहनें सीएम का सम्मान नहीं करेंगी, उनकी जांच कराएंगे

रतलाम में शनिवार को जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री डॉ. विजय शाह ने सत्ता का दंभ दिखाया। जिन लाड़ली बहनों को सरकार सिर-माथे बिठाती है, मंत्री ने उन्हीं को खुली धमकी दे डाली। उन्होंने कहा कि सरकार अगर लाड़ली बहनों को करोड़ों रुपए दे रही है, तो उन्हें मुख्यमंत्री का सम्मान करने आना चाहिए। मंत्री ने कहा- ‘जो सम्मान करने आएंगी, उनके 250 रुपए बढ़ा देंगे, जो नहीं आएंगी, उनकी जांच पेंडिंग कर देंगे। मतलब वो पेंडिंग हो ही जाएंगी। फिर सब आएंगी।’ महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी से जिले में लाड़ली बहनों की संख्या पूछने के बाद मंत्री बोले- ‘जिले में ढाई लाख लाड़ली बहनें हैं। मुख्यमंत्री को दो साल हो गए हैं। ढाई लाख में से 50 हजार तो आएं। सरकार 1500 रुपए के हिसाब से करोड़ों दे रही है, तो दो साल में एक बार धन्यवाद तो बनता है। भोजन हम करा देंगे। जो नहीं आएंगी, फिर देखते हैं… जिनके ढाई-ढाई सौ बढ़ रहे हैं, उनकी जांच करेंगे। किसी का आधार लिंक नहीं है तो जांच थोड़ी पेंडिंग कर देंगे।’ बैठक में अधिकारी की जगह मैकेनिक, फिर अपमान : बैठक में मंत्री का दूसरा आक्रामक रवैया तब दिखा, जब नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारी की जगह एक मैकेनिक पहुंचा। पहले मंत्री ने उसे फटकार लगाई, फिर पास बुलाकर पैरों में झुककर प्रणाम किया और उसके बाद चुटकी बजाकर बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा- ‘ये रास्ता है, बाहर निकलो।’ मैकेनिक ने सफाई दी कि उसके पास रतलाम, मंदसौर समेत तीन जिलों का प्रभार है। बता दें कि विजय शाह इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। 2023 विधानसभा चुनाव… जिन 34 सीटों पर महिलाओं की वोटिंग ज्यादा हुई थी, उनमें से 24 भाजपा जीती थी जिन लाड़ली बहनों को मंत्री धमका रहे हैं, 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हीं के कारण भाजपा सत्ता में आई थी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई लाड़ली बहना योजना गेमचेंजर साबित हुई थी। भाजपा ने प्रतिमाह 1 हजार रु. महिलाओं को दिए और चुनाव बाद इसे 3 हजार रुपए देने का वादा किया था। जिन 34 सीटों पर महिलाओं की वोटिंग ज्यादा हुई थी, उनमें से 24 भाजपा जीती थी। पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले ये दोगुनी थी। भाजपा ने 27 महिला उम्मीदवारों को उतारा था, उनमें से 21 जीतीं। बाद में यही फॉर्मूला बाकी राज्यों ने अपनाया था।

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