मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य पहुंची चीता “धीरा”:कूनो नेशनल पार्क से 20 सदस्यीय टीम लाई; अभी अलग बाड़े में रहेगी, अब कुल 3 चीते

श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क के बाद अब मादा चीता ‘धीरा’ का नया घर मंदसौर जिले का गांधी सागर वन अभयारण्य बन गया है। बुधवार शाम उसे रावलीकुड़ी गांव के पास बनाए गए विशेष बाड़े में छोड़ा गया। इससे पहले 20 अप्रैल को सीएम डॉ. यादव ने दो नर चीते ‘प्रभाष’ और ‘पावक’ को यहां छोड़ा था। अब अभयारण्य में कुल 3 चीते हो गए है। धीरा ने खुले मैदान में लगाई दौड़ जैसे ही पिंजरे से बाहर निकली, धीरा ने गांधी सागर वन अभयारण्य के खुले मैदान में दौड़ लगाई। उसे नए माहौल में सहज देख अधिकारी संतुष्ट नजर आए। यह मादा चीता करीब साढ़े सात साल की है। नर चीतों के बाद अब मादा की एंट्री पांच महीने पहले इसी इलाके में दो नर चीते, प्रभास और पावक, छोड़े गए थे। उनकी सेहत अच्छी बनी हुई है। इसी को देखते हुए अब मादा चीता को भी यहां लाने का फैसला किया गया है ताकि इनकी संख्या बढ़ाई जा सके। कूनो से 20 सदस्यीय टीम लेकर आई बुधवार सुबह कूनो नेशनल पार्क से 20 सदस्यीय टीम आठ वाहनों के काफिले के साथ मंदसौर के लिए रवाना हुई थी। शाम को गांधी सागर के गेट नंबर 3 के पास बने बाड़े में धीरा को छोड़ा गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अभी अलग बाड़े में रहेगी धीरा धीरा को फिलहाल एक अलग बाड़े में रखा जाएगा ताकि वह नए माहौल के साथ घुल-मिल सके। कुछ समय बाद उसे प्रभास और पावक के साथ छोड़ा जाएगा। चीतों की संख्या बढ़कर हुई 27 प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सैन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर करीब तीन साल पहले अफ्रीका से चीतों को भारत लाया गया था और उन्हें कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया था। अब देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 27 हो गई है। धीरा पर रखी जाएगी कड़ी निगरानी धीरा की गतिविधियों पर वन विभाग की टीम लगातार नजर रखेगी। अफसरों के अनुसार, गांधी सागर में चीतों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया गया है और इस कदम से चीता संरक्षण को और मजबूती मिलेगी। इससे पहले छोड़े थे दाे चीते बता दें कि इससे पहले, 20 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधीसागर अभयारण्य में कूनो से लाए गए दो नर चीते ‘प्रभाष’ और ‘पावक’ को छोड़ा था। गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए दूसरे उपयुक्त स्थल के रूप में चुना गया है। यह परियोजना मध्यप्रदेश में चीतों को सुरक्षित और अनुकूल आवास उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।

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