मंदसौर में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग ने यह कार्रवाई उज्जैन वन वृत्त के वन संरक्षक और मंदसौर के वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में की। यह वन अपराध प्रकरण क्रमांक 3832/14 के तहत दर्ज किया गया है। वन विभाग की टीम ने बुधवार को रेवास देवड़ा स्थित धुंधलेश्वर महादेव मेले में गुप्त सूचना के आधार पर दबिश दी। इस दौरान आरोपियों के पास से संरक्षित प्रजातियों के वन्यजीवों के अवशेष बरामद किए गए। जब्त की गई सामग्री में मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के 10 हत्थाजोड़ी नग, हेजहॉग (सेही प्रजाति) के अवशेष, अन्य वन्यजीवों के अंग और अवशेष शामिल हैं। इसके अलावा, अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं। दो आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा ये सभी प्रजातिया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित श्रेणी में आती हैं। इस अधिनियम के अनुसार, इनके अवैध शिकार, व्यापार या तस्करी पर 3 से 7 वर्ष तक के कारावास और न्यूनतम 25,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सरमन पिता अमरसिंह पारदी (57 वर्ष), निवासी अरनिया निजामुद्दीन, जिला मंदसौर, और जुगतारसिंह पिता केमसिंह पारदी (39 वर्ष), निवासी डिगांव खुर्द (हाल मुकाम अरनिया निजामुद्दीन), जिला मंदसौर के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, मंदसौर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने उन्हें 28 फरवरी 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया है। वन विभाग इस मामले में आगे की जाँच कर रहा है और वन्यजीव तस्करी से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि संरक्षित वन्यजीवों या उनके अंगों की खरीद-फरोख्त या शिकार से संबंधित कोई भी जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि जैव विविधता के संरक्षण प्रयासों को मजबूत किया जा सके।


