मंदिरों में अखंड ज्योत जलेंगी, सप्तशती पाठ भी किए जाएंगे

इस वर्ष की पहली गुप्त नवरात्र का शुभारंभ माघ माह की शुक्ल प्रतिपदा 19 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा। समापन 27 जनवरी को होगा। इस दौरान देवी की गुप्त तंत्र साधना, उपासना और मंत्र-जप किया जाएगा। देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा नौ दिन तक अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ और हवन का आयोजन होगा। अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन और भोज का आयोजन भी होगा। माता राजराजेश्वरी मंदिर महंत अजय शर्मा ने बताया कि गुप्त नव रात्रियों का महत्व 10 महा विद्याओं की गुप्त साधना तंत्र मंत्र सिद्धि और गोपनीय मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए होता है। जो सामान्य नवरात्रि से अलग एकांत में की जाती है। माघ मास की नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाते हैं। आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि आसान मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाये जाते हे। नवरात्रि सार्वजनिक पूजा के बजाय गोपनीय साधना तंत्र मंत्र और ब्रह्मविद्या की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माने गए हैं। इस दौरान मां दुर्गा के 10 महाविद्या स्वरूपों काली, तारा, छिन्नमस्ता, शोडसी,भुवनेश्वरी,तिर ुपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, ओर कमला की पूजा की जाती है। महंत अजय शर्मा ने बताया कि यह तंत्र साधकों के लिए विशेष है लेकिन गृहस्थ भी इन्हे मना सकते हैं। माघ मास के गुप्त नवरात्रि में स्नान दान और मौन व्रत का महत्व है। मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना से जीवन की बाधा ये दूर होती है। शत्रु शांत होते हैं और सिद्धियां प्राप्त होती है। मां दुर्गा के 32 नाम का जाप करने से विशेष फल मिलता है। यह नवरात्रि आप शुद्ध और आध्यात्मिक शक्ति के लिए सर्वोत्तम है। गुप्त नवरात्र का देवी भागवत ओर मार्कंडेय पुराण में उल्लेख:- गुप्त नवरात्र की साधना पौराणिक काल से चली आ रही है। देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण में इसका उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि गुप्त साधना से शक्ति, मानसिक शांति और समृद्धि मिलती है। यह नवरात्र मुख्य रूप से घर और मंदिर में गुप्त रूप से साधना, मंत्र-जप, हवन और यंत्र पूजन के लिए मनाया जाता है। पारंपरिक तौर पर यह माघ और आषाढ़ मास में आता है, जबकि शारदीय और चैत्र नवरात्र सार्वजनिक रूप से अधिक मनाए जाते हैं।

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