नईगढ़ी तहसील के बरहा गांव में गरीबी और कठिनाइयों के बीच, पोषण पुनर्वास केंद्र ने दो जिंदगियों को नई उम्मीद दी। सीता कोल की मौत के बाद जुड़वां बच्चियों की बिगड़ती हालत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया, लेकिन केंद्र की देखभाल से बच्चियां अब स्वस्थ हो रही हैं। नईगढ़ी तहसील के बरहा गांव की सीता कोल, पत्नी आशीष कोल ने 27 अक्टूबर को संजय गांधी अस्पताल, रीवा में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। एक सप्ताह बाद सीता की मौत हो गई। बच्चियां बहुत कमजोर थीं और उनके स्वास्थ्य को लेकर परिवार गहरे संकट में था। बच्चियों की कमजोर स्थिति और परिवार की कठिनाई सीता की मौत के बाद बच्चियों की हालत बिगड़ने लगी। दादा रामलाल (62) ने बताया कि परिवार पहले से ही मजदूरी पर निर्भर था। बहू की मौत के बाद बच्चियां कमजोर और नाजुक हो गईं। उन्हें 15 दिन के लिए अस्पताल की नर्सरी में रखा गया। इसके बाद जब बच्चियों को घर लाया गया तो उनकी हालत और खराब होने लगी। पोषण पुनर्वास केंद्र की भूमिका 8 दिसंबर को आशा कार्यकर्ता सुनीता द्विवेदी ने बच्चियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नईगढ़ी ले जाने का सुझाव दिया। डॉक्टरों ने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती की सलाह दी, लेकिन दादा ने घर की परिस्थितियों का हवाला देकर इनकार कर दिया। समझाइश और सहायता का प्रयास 11 दिसंबर को डॉक्टर रामचंद्र पटेल और डॉक्टर शिव कुमार पटेल ने बच्चियों की गंभीर स्थिति का संज्ञान लिया। घर जाकर दादा-दादी को समझाया और बच्चियों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। एक बच्ची की हालत इतनी नाजुक थी कि जिला अस्पताल रेफर करने की आवश्यकता पड़ी। जिसके बाद बीएमओ डॉ. एसडी कोल ने परिवार को समझाया और बच्चियों की दादी के साथ घर की बूढ़ी मां को भी अस्पताल में रहने की अनुमति दी। इससे परिवार ने बच्चियों को भर्ती कराने के लिए सहमति दी। पुनर्वास केंद्र में देखभाल और सुधार पोषण पुनर्वास केंद्र प्रशिक्षक आशीष खरे ने बताया कि बच्चियों का वजन भर्ती के समय मात्र 1 किलो 270 ग्राम था। उन्हें “कंगारू मदर केयर” के माध्यम से विशेष आहार और देखभाल दी गई। 14 दिनों में बच्चियों का वजन बढ़कर 1 किलो 700 ग्राम हो गया। सुधार होते देख परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। अस्पताल के स्टाफ ने घर जैसा माहौल प्रदान किया, जिससे परिवार का बच्चियों के प्रति लगाव और बढ़ा। परिवार में लौटी खुशियां दादी श्याम कली ने बताया कि बहू की मौत के बाद बच्चियों के बचने की उम्मीद नहीं थी। लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्र की सहायता से बच्चियां पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। परिवार में अब खुशियां लौट आई हैं। कुपोषित बच्चों के लिए पुनर्वास केंद्र की अपील डॉ. आरसी पटेल, मेडिकल ऑफिसर, ने बताया कि 15 नवंबर 2010 को नईगढ़ी में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना हुई थी। यहां 5 साल तक के कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनकी देखभाल की जाती है। केंद्र में बच्चों को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज तत्वों से युक्त भोजन दिया जाता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि यदि आपके आसपास कोई बच्चा कमजोर या कुपोषित है, तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराएं।


