मऊगंज जिले की जनपद पंचायत नईगढ़ी के ग्राम पंचायत कोट में गोशाला में गायों की जगह खूंटे में एक गधा बंधा पाया गया। इधर, जिले की वावनगढ़ और मालैगवा जैसी कई गोशालाओं के निरीक्षण के दौरान एक भी गाय मौजूद नहीं मिली। इन गोशालाओं में न तो पशुओं के लिए चारा मिला, न भूसा और न ही पानी या देखरेख की कोई व्यवस्था पाई गई। ब्लॉक स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों ने गोवंश की संख्या ‘शून्य’ दर्ज की, वहीं जिला स्तर पर इन आंकड़ों को बढ़ाकर 250 तक दिखाया गया। इन्हीं फर्जी आंकड़ों के आधार भुगतान किया जाता है। गोसेवक योगराज पांडे ने बताया कि वास्तविकता में कोट की गोशाला में मुश्किल से 30-40 गायें ही रहती हैं, लेकिन निगरानी न होने के कारण यहां ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली स्थिति बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे वर्षों से निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं, लेकिन शासन से उन्हें आज तक एक रुपए की मदद नहीं मिली, जबकि भ्रष्ट लोग गोमाता के नाम का पैसा ले रहे हैं। ब्लॉक वेटरिनरी ऑफिसर के.के. गुप्ता का कहना है कि बिना सत्यापन के हुए भुगतानों की जानकारी केवल वरिष्ठ कार्यालय ही दे सकता है। हालांकि, उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर ऐसे संदिग्ध भुगतानों पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। विधायक प्रदीप पटेल के विधानसभा में सवाल उठाए जाने के बावजूद अब तक प्रशासन ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।


