प्रदेश में पेड़ कटाई को लेकर मामला गरमाया है। एनजीटी ने बिना अनुमति एक भी पेड़ की कटाई, छंटाई तक पर रोक लगा दी है। इसके बीच उपनगरीय क्षेत्र मकरोनिया में पांच हरे भरे वर्षों पुराने पेड़ काट दिए गए। थाने में पहुंची शिकायत पर एक माह गुजर जाने के बाद भी न एफआईआर दर्ज की गई न ही पेड़ काटने वाले का पता चल सका है। मकरोनिया नगर पालिका क्षेत्र में रहवासी क्षेत्र में 5 हरे भरे-पेड़ काटने का मामला सामने आया है। इस संबंध में संज्ञान लेते हुए मकरोनिया नगर पालिका ने थाना प्रभारी मकरोनिया को एफआईआर दर्ज करने पत्र भी लिखा। बावजूद इसके अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। 17 दिसंबर को नपा सीएमओ पवन शर्मा ने पत्र में लिखा कि गायत्री नगर नाले के पास वार्ड क्रमांक-2 में पूर्ण विकसित एवं जीवित 5 नग पेड़ अज्ञात व्यक्ति के द्वारा काटकर नाले के मार्ग को अवरूद्ध किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा गठित समिति और संबंधित वृक्ष अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना राज्य में अगली सुनवाई की तारीख तक किसी भी प्रकार से कोई भी वृक्ष काटने, छांटने या प्रत्यारोपित नहीं किए जाने का निर्णय पारित किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन के लिए अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर तत्काल आवश्यक कार्यवाही प्रस्तावित किए जाना सुनिश्चित करें। पटवारी विनोद साहू ने बताया कि जिस जमीन से पेड़ काटे गए हैं, वह जमीन रतन केसरवानी के नाम पर है। उनके द्वारा यहां डली जमीन के चारों ओर बाउंड्रीवॉल बनाई जा रही है। नगर पालिका ने इसमें कार्रवाई की है। राजस्व से उनकी जमीन का सीमांकन होगा। वहीं मामले में केसरवानी का कहना है कि न हमने पेड़ कटवाए हैं न ही अभी ऐसी कोई जानकारी है। वहां जिन्होंने प्लॉट लिए होंगे, उन्होंने काटे होंगे। हमने बहुत पहले प्लॉट बेचे थे। 20 साल पुरानी जमीन है। बहुत पुरानी बाउंड्रीवॉल है, वही रिपेयर हुई है। यह रहवासीय एरिया है।


