कोटपूतली-बहरोड़ जिले में मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग बाजार सज गए हैं। इस पावन पर्व पर युवा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जागरूकता दिखा रहे हैं, जहां वे प्लास्टिक की बजाय कागज से बनी पतंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजारों में कागज और प्लास्टिक दोनों तरह की पतंगों की विभिन्न किस्में उपलब्ध हैं। हालांकि, पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए, युवा विशेष रूप से कागज की पतंगों का चयन कर रहे हैं। पतंग विक्रेता मनोज कुमार टॉक ने बताया कि बाजार में उत्तर प्रदेश, बरेली और जयपुर की बनी पतंगों की अधिक मांग है। उन्होंने पुष्टि की कि पतंगें कागज और प्लास्टिक दोनों से बनाई जाती हैं, लेकिन युवा उपभोक्ता पर्यावरण हितैषी होने के कारण कागज की पतंगों को ही पसंद कर रहे हैं। युवाओं ने बताया कि कागज से बनी पतंगें पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। इसी कारण वे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्लास्टिक की जगह कागज की पतंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं और दूसरों को भी कागज की पतंगें खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। पर्यावरणविद् दीप सिंह शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ रही है। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपने दैनिक जीवन को प्लास्टिक मुक्त बनाना होगा, और त्योहारों पर युवाओं द्वारा प्लास्टिक का उपयोग न करना यह दर्शाता है कि देश का युवा अब पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान दे रहा है।


