मगरमच्छों के पेट में मिले घड़ियाल:चंबल सेंचुरी में रेडियो ट्रांसमीटर से खुलासा; सबसे सुरक्षित गढ़ में ही शिकार, अफसर उपाय तलाश रहे

मध्य प्रदेश में घड़ियालों पर सीधा हमला हो रहा है। जिस नदी को देश में घड़ियालों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, वहीं अब उनके बच्चों की जान खतरे में है। 435 किलोमीटर तक फैले चंबल घड़ियाल सेंचुरी की हालिया निगरानी में खुलासा हुआ है कि तीन साल तक के करीब 120 सेंटीमीटर लंबे घड़ियाल, लगातार मगरमच्छों के हमले का शिकार हो रहे हैं। वन विभाग की ‘गो एंड रिलीज’ योजना के तहत घड़ियालों पर लगाए गए रेडियो ट्रांसमीटर से इसकी पुष्टि हुई है। ट्रांसमीटर सही सलामत मिले, लेकिन उनकी लोकेशन नदी में नहीं, बल्कि मगरमच्छों के पेट से ट्रेस हुई। जांच आगे बढ़ी तो मगरमच्छ के मल में घड़ियाल के अवशेष मिलने से इस पर मुहर लग गई। चंबल घड़ियाल सेंचुरी में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। मुरैना से भोपाल तक अफसरों की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर घड़ियालों का सबसे सुरक्षित गढ़ कैसे उनकी शिकारगाह बनता जा रहा है। 1978-79 में बनी थी घड़ियाल सेंचुरी
देश में घड़ियालों के सुरक्षित संरक्षण के लिए जब नदियों का अध्ययन किया गया, तो चंबल नदी को सबसे स्वच्छ और अनुकूल पाया गया। साफ पानी और उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण में ही घड़ियाल बेहतर तरीके से जीवित रह पाते हैं। इसी आधार पर 1978-79 में मुरैना जिले के देवरी गांव के पास देवरी घड़ियाल सेंचुरी की स्थापना की गई। शुरुआत में चंबल नदी की बीच धारा से पांच किलोमीटर क्षेत्र को सेंचुरी घोषित करने का प्रस्ताव था, लेकिन इससे कई गांव प्रभावित हो रहे थे। इसके आधार पर नदी की मध्य धारा से एक किलोमीटर क्षेत्र को चंबल घड़ियाल सेंचुरी के रूप में चिह्नित किया गया। यह घड़ियाल सेंचुरी कुल 435 किलोमीटर तक फैली है। यहां घड़ियालों के संरक्षण के लिए वन विभाग लंबे समय से लगातार काम कर रहा है। 2025 की गणना के अनुसार, सेंचुरी में घड़ियालों की संख्या बढ़कर 2462 तक पहुंच गई है।जबकि सेंचुरी की स्थापना के बाद 1978-79 में चंबल नदी में 75 घड़ियाल छोड़े गए थे। तुलना करें तो बिहार की गंडक नदी में लगभग 400 और नेपाल के कोसी (कटनकिया घाट) क्षेत्र में भी करीब 400 घड़ियाल ही हैं। इन नदियों की तुलना में चंबल नदी का वातावरण घड़ियालों के लिए सबसे अनुकूल साबित हुआ है, जहां उनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट में खुलासा- मगरमच्छों के पेट में मिले ट्रांसमीटर
जलीय जीव विशेषज्ञ ज्योति प्रसाद दंडोतिया के अनुसार, चंबल सेंचुरी में घड़ियालों की संख्या जिस अनुपात में बढ़नी चाहिए थी, वह नहीं बढ़ सकी। इसकी बड़ी वजह यह है कि चंबल में आने वाली बाढ़ के दौरान घड़ियालों के सिर्फ 3 प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। इसके अलावा, वयस्क मगरमच्छ तीन साल तक के घड़ियालों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस बात का खुलासा एमसीबीटी (मद्रास क्रोकोडायल बैंक ट्रस्ट) की रिपोर्ट में भी हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान द्वारा चंबल नदी में छोड़े गए घड़ियालों पर रेडियो टेलीमेट्री ट्रांसमीटर लगाए गए थे। जब इनकी लोकेशन ट्रेस की गई, तो कई ट्रांसमीटर एडल्ट मगरमच्छों के पेट के भीतर पाए गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि मगरमच्छ लगातार छोटे घड़ियालों पर हमला कर रहे हैं। 2017-18 में पहली बार सामने आया था मगरमच्छों का अटैक
चंबल नदी में घड़ियालों पर मगरमच्छों के हमले और शिकार की जानकारी वन विभाग को करीब 8 साल पहले वर्ष 2017-18 में ही मिल चुकी थी। इसे लंबे समय तक दबाए रखा गया। अब जब घड़ियालों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आने लगीं, तो हाल ही में देवरी घड़ियाल सेंचुरी में पहला मामला दर्ज किया गया। देवरी सेंचुरी में पले घड़ियालों को अधिकतम तीन साल की उम्र या 120 सेंटीमीटर लंबाई तक रखा जाता है। इसके बाद वन विभाग द्वारा संचालित ‘गो एंड रिलीज’ कार्यक्रम के तहत इन्हें चंबल नदी में छोड़ा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल करीब 100 घड़ियाल नदी में रिलीज किए जाते हैं। इंग्लैंड के वैज्ञानिक ने चंबल नदी को सेंचुरी के लिए चुना था
इंग्लैंड के वैज्ञानिक एचआर बस्टर्ड ने दुनिया की कई नदियों का सर्वे किया, ताकि विलुप्त होते घड़ियालों की नस्ल को बचाने के लिए उपयुक्त स्थान खोजा जा सके। स्वच्छ पानी और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण की जो तलाश वह कर रहे थे, वह चंबल नदी में पूरी होती दिखी। इसके बाद अमेरिका की फंडिंग के जरिए चंबल नदी में घड़ियाल संरक्षण के लिए सेंचुरी की स्थापना की गई। हर साल 200 अंडे कलेक्ट करता है वन विभाग
चंबल अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग हर साल करीब 200 घड़ियालों के अंडे कलेक्ट कर देवरी घड़ियाल सेंचुरी में लाता है। मादा घड़ियाल मार्च-अप्रैल के दौरान अंडे देती हैं। मई महीने में अंडों को कलेक्ट कर सेंचुरी में लाया जाता है। इसके बाद जून में हैचिंग होती है और अंडों से घड़ियाल के शावक निकलते हैं। इस दौरान सेंचुरी में अंडों को 33 से 36 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रेत के भीतर दबाकर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि शावकों का सही विकास हो सके। यह खबर भी पढ़ें… नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा गधे, छतरपुर में खच्चर मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में गधों की संख्या सबसे ज्यादा है। छतरपुर में खच्चर और सूअर अधिक हैं। उज्जैन में घोड़ों की तादाद सबसे ज्यादा है। दैनिक भास्कर को मिले पशु गणना के आंकड़ों के मुताबिक पूरे प्रदेश में 3 करोड़ 75 लाख 92 हजार 771 पशु हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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