‘मगरमच्छ वाले बीजेपी नेता’ को बचाने की कोशिश:अफसरों का तर्क– जिस मंदिर के तालाब में मगरमच्छ वो ट्रस्ट का; लेकिन मंदिर बंगले के भीतर

सागर के जिस बंगले से वन विभाग ने 4 मगरमच्छ रेस्क्यू किए हैं, उस बंगले के मालिक भाजपा नेता हरवंश सिंह राठौर को बचाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अफसरों ने ढूंढ-ढूंढकर ऐसे तर्क निकाले हैं कि राठौर के सुरक्षित निकलने का रास्ता तैयार हो गया है। वन विभाग ने जो प्रायमरी ऑफेंसिव रिपोर्ट (पीओआर) दर्ज की है, वो मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ की है। तर्क है कि ये मगरमच्छ मंदिर ट्रस्ट के ‘कुंड’ में पल रहे थे। मंदिर ट्रस्ट ही इनकी देखरेख करता था। अफसरों के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि वो मंदिर तो बंगले की चारदीवारी के भीतर ही है, फिर बंगले के मालिकों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? बंगले में जहां मंदिर की लोकेशन है, वो बाहर से दिखाई देती है लेकिन यहां आम लोगों के जाने का रास्ता ही नहीं है। वन विभाग बंगले के मालिकों को बचाने के लिए क्या-क्या तरकीबें निकाल रहा है, पढ़िए रिपोर्ट… 5 पॉइंट्स में जानिए, किस तरह बीजेपी नेता को बचाने की तैयारी… 1. मगरमच्छ वाला कुंड बंगले के भीतर, फिर ट्रस्ट का क्या रोल?
तर्क: वन विभाग ने जिस कुंड से मगरमच्छों को पकड़ा है, उसे लेकर राठौर परिवार की तरफ से बताया गया है कि कैलाश मंदिर ट्रस्ट ही उसकी देखरेख करता है। वन विभाग ने ट्रस्ट के खिलाफ पीओआर दर्ज की है। इस ट्रस्ट के पुजारी भूपेंद्र तिवारी से वन विभाग ने दस्तावेज मांगे हैं कि यहां मगरमच्छ कब से हैं। ये भी तर्क दिया जा रहा है कि राठौर परिवार ने 20 साल पहले वसीयतनामा लिखकर मंदिर वाले हिस्से को ट्रस्ट के सुपुर्द कर दिया था। हकीकत: ये मंदिर राठौर परिवार के बंगले की चारदीवारी के भीतर बना हुआ है। मंदिर में अलग से जाने का कोई रास्ता नहीं है। बंगले से होकर ही मंदिर में पहुंचा जा सकता है। 2. मगरमच्छ पाले गए हैं या पानी के बहाव में बहकर पहुंचे?
तर्क: वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) सुभरंजन सेन ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा था, ‘इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं यह मगरमच्छ प्राकृतिक रूप से तो यहां नहीं आए हैं। यदि ये खुद आए हैं और परिवार ने इसकी जानकारी वन विभाग को दे दी थी तो फिर स्थिति दूसरी होगी।’ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के मुताबिक, मगरमच्छ शेड्यूल वन कैटेगरी में आता है। इसे पालना कानून का उल्लंघन है। हकीकत: सागर के सदर एरिया में रहने वाले लोगों से भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया कि वे पिछले 40 साल से राठौर बंगले में मगरमच्छ देखते रहे हैं। बंगले के कुंड को जोड़ने वाला कोई नदी या नाला नहीं है, जिससे मगरमच्छ यहां प्राकृतिक रूप से पहुंच सके। 3. मगरमच्छों को ले जाने के लिए 2014 में वन विभाग को लिखा पत्र कहां है?
तर्क: आयकर विभाग ने 5 जनवरी को हरवंश सिंह राठौर के बंगले पर छापा मारा था, उसी दिन मगरमच्छों की बात सामने आई थी। उस समय परिवार ने कहा था कि यह मगरमच्छ 40–50 साल से हमारे यहां हैं। हमने तो 2014 में ही वन विभाग को पत्र लिखकर इन्हें ले जाने को कहा था। हकीकत: एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी परिवार कोई पत्र देने को तैयार नहीं है। सागर की दक्षिण वन मंडल की एसडीओ विनीता जाटव कहती हैं कि पत्र ढूंढा जा रहा है, मिलने पर रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। राठौर परिवार ने भी उस पत्र की कोई रिसीविंग नहीं सौंपी है। पीसीसीएफ सेन से पत्र के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि जांच में पत्र सामने आएगा तो उसे भी दिखवाया जाएगा। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। 4. वन विभाग प्रमुख के बयान के 3 दिन बाद केस दर्ज क्यों?
तर्क: वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने 10 जनवरी को मीडिया को दिए बयान में कहा था कि भाजपा नेता के बंगले से मगरमच्छ बरामद हुए हैं, इसके बाद पीओआर दर्ज की गई है। इधर, सागर के वन विभाग के अधिकारी पीओआर दर्ज होने से इनकार करते रहे। हकीकत: सागर वन वृत्त की एसडीओ साउथ विनिता जाटव ने दैनिक भास्कर से कहा कि अभी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। इन विरोधाभासी बयानों के बीच 13 जनवरी को विभाग ने प्रेस नोट जारी करके बताया कि जांच के लिए केस दर्ज किया है। 5. कार्रवाई को लेकर अफसर बोले- ये मेरा एरिया नहीं
तर्क: भास्कर की पड़ताल में ये भी तथ्य सामने आया है कि इनकम टैक्स के छापे के बाद जब भोपाल से वन मुख्यालय से एक्शन के लिए कहा गया, तो सागर के उत्तर और दक्षिण वनमंडल की टीम कार्रवाई से यह कहकर बचती रही कि ये उनका एरिया नहीं है। हकीकत: इस पर मानचित्रकार को वहां बुलवाया गया, तब तय हुआ कि ये दक्षिण वन मंडल के हिस्से में आता है। पहले भी लगे आरोप, विधानसभा में सवाल भी लेकिन एक्शन नहीं
वन एवं पर्यावरण एक्टिविस्ट अजय दुबे ने वन विभाग के प्रमुख सचिव, वन बल प्रमुख सहित एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) को भेजी गई शिकायत में उल्लेख किया है कि राठौर परिवार पर पूर्व में भी वन अपराध दर्ज हो चुके हैं। इन पर विधानसभा में प्रश्न भी उठे थे। बंगले में मगरमच्छ के अलावा हिरण और बारहसिंघा भी थे, वो कहां गए
सागर में सदर बाजार की सीमा पर स्थित राठौर बंगले में केवल मगरमच्छ ही नहीं बल्कि हिरण, बारहसिंघा, बंदर सहित कई वन्य जीव थे। सागर शहर के नागरिक चिड़ियाघर देखने जाते थे। मगरमच्छों की बरामदगी के समय भी यहां अन्य वन्यजीव होने की बात सामने आई लेकिन बाद में बताया गया कि केवल बंदर बरामद हुए हैं। लाल मुंह के बंदरों को संरक्षित प्राणियों की सूची से बाहर कर दिया गया है इसलिए इनके मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप सिद्ध होने पर वन्य प्राणी अधिनियम के तहत इस केस में 7 साल की सजा और ₹25000 तक के जुर्माने का प्रावधान है। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें.. मगरमच्छों वाली हवेली कभी बीजेपी का पॉलिटिक्स सेंटर रही सागर जिले का एक बंगला इन दिनों देशभर में चर्चा में है। चर्चा इस बंगले से मिले गोल्ड और कैश से ज्यादा यहां पाले जा रहे मगरमच्छों की है। एक नहीं 4 मगरमच्छ। बंगले के भीतर स्वीमिंग पूल जैसे तालाब में 3 नर और एक मादा मगरमच्छ। इनकी उम्र भी 30 से 40 साल होगी। पूरी खबर पढ़ें.. पूर्व भाजपा विधायक से मिले करोड़ों रुपए कैश और गोल्ड:सागर में आयकर विभाग ने पकड़ी 150 करोड़ की टैक्स चोरी; 7 लग्जरी कारें बरामद पूर्व विधायक के घर 2 और मगरमच्छ मिले:सागर में वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू; रात में ही बामनेर नदी में छोड़ा जाएगा

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