मणिपुर में उग्रवादी रंगदारी मांग रहे, डर से बाजार बंद:व्यापार संगठन ने 5 किमी लंबी रैली निकाली, सैकड़ों लोगों ने राज्य छोड़ा

मणिपुर में उग्रवादी संगठन हर सेक्टर के कारोबारियों को फोन कर रंगदारी मांग रहे हैं। व्यापारी कहते हैं कि शिकायत नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पास हमारा लेखा-जोखा हैं। उनके डर बाजार बंद होने लगे हैं। इसके विरोध में शनिवार को इंफाल में हजारों लोगों ने 5 किमी लंबी रैली निकाली। यह रैली सेव मणिपुर अभियान के तहत कोकोमी नामक संगठन ने आयोजित की थी। कर्ज में डूबे मारवाड़ी, पंजाबी कारोबारी भी राज्य छोड़ रहे हैं। इस बाजार से जुड़े मारवाड़ी समुदाय के 500 परिवार में से 40-50 परिवार, पंजाबी समुदाय के 100 परिवार में से 20-25 परिवार बिजनेस ठप होने से पलायन कर चुके हैं। 4 तस्वीरों में देखें रैली… 60-65% व्यापार ही हो रहा राज्य के प्रमुख व्यापारिक केंद्र थांगल और पाउना बाजार में 60-65% ही व्यापार हो रहा है। मणिपुर एफएमसीजी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विजय पाटनी कहते है, चुराचांदपुर, कांग्पोक्पी और चंदेल जिलों तथा आसपास के इलाकों में 30-37% कारोबार होता था, जो अब बंद है। उन्होंने बताया कि थांगल-पाउना बाजार में मारवाड़ी, जैन, पंजाबी, बिहारी, बंगाली सहित कई समुदाय के लोग बिजनेस करते थे। मणिपुर में कोई फैक्ट्री या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है। यहां केवल ट्रेडिंग होती है। हिंसा के बाद हिल क्षेत्र में रहने वाले गुवाहाटी, मिजोरम से माल ले रहे हैं, जिससे इंफाल वैली का मार्केट चौपट हो गया है। एफएमसीजी के साथ पर्सनल हाइजीन का सबसे बड़ा बाजार हिल्स इलाके यानी हिंसाग्रस्त जिले थे, जो अब बंद है। हिंसा के बाद माल गुवाहाटी, मिजोरम से आने लगा तो हमारा धंधा पूरी तरह चौपट हो गया। हिंसा की वजह से हमारा बिजनेस 3 साल पीछे चला गया है। उग्रवादी 1 लाख रुपए तक रंगदारी मांगते हैं थांगल बाजार के एक कारोबारी ने बताया कि उग्रवादी संगठन हर सेक्टर के कारोबारियों को फोन कर रंगदारी मांग रहे हैं। वे किसी से 10 हजार तो किसी से 1 लाख तक मांगते हैं। अस्पताल भी मुश्किल में जा पाते हैं। हिंसा के 1004 दिन कुकी-मैतेई समुदायों की लड़ाई के चलते मणिपुर को अशांत हुए आज 1004 दिन हो चुके हैं, लेकिन इंफाल वेली से म्यांमार बॉर्डर वाले मोरेह टाउन तक कहीं भी हालात सामान्य नहीं हैं। यहां राष्ट्रपति शासन लगे 13 फरवरी को एक साल हो जाएगा और आज की स्थिति ये है कि राज्य के 16 में से 8 जिलों में ज्यादा अशांति है। इसकी बड़ी वजह कुकी-मैतेई समुदायों से जुड़े हथियारबंद गिरोह हैं, जिन्हें उग्रवादी कहा जा रहा है। इनके खौफ के चलते ही व्यापार बंद हो रहे और युवा राज्य से बाहर जा रहे। जगह-जगह पंपों के बाहर पेट्रोल बोतलों में बिकता दिख जाएगा। उग्रवादी संगठन बेखौफ होकर रंगदारी वसूल रहे हैं। इनके ही फरमानों पर बाजार खुलते और बंद होते हैं। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों की तैनाती पूरे राज्य में हर एक-दो किमी में मिल जाएगी। फिर भी म्यांमार बॉर्डर तक यही नजारे दिख जाएंगे। पेट्रोल ब्लैक में मिल रहा सीजेएई अकादमी के प्रमुख प्रो. सांजेनबम जुगेश्वर ने बताया कि बोतल ऑयल कॉर्पोरेशन(BOC) चलता है। पेट्रोल कई बार हमें ब्लैक में ही लेना पड़ता है, क्योंकि उग्रवादी समूहों की धमकी के बाद कब-कौन सा पेट्रोल पंप अचानक बंद हो जाए, कह नहीं सकते। विष्णुपुर और थाउबल के पेट्रोल पम्प मालि​कों को रंगदारी देने के लिए रोज धमकी दी जा रही हैं। जो नहीं देता या पुलिस की मदद लेता, उसके ​​खिलाफ फरमान आते हैं। ————- ये खबर भी पढ़ें… मणिपुर में कुकी समुदाय जानवरों की आवाज निकालकर डरा रहा:हिंसा के ढाई साल बाद भी दहशत मणिपुर की राजधानी इम्फाल वेस्ट से 25 किलोमीटर दूर आखिरी गांव कौत्रुक चिंग लेइकाई में लोग हिंसा के ढाई साल बाद भी दहशत में हैं। यहां के लोगों का आरोप की कुकी समुदाय के लोग उन्हें उकसाने के लिए रात में जानवरों की आवाज निकलते हैं। उनका कहना है कि कुकी चाहते हैं कि गांव वाले इसका जवाब दें जिससे कुकी उनपर हमला कर सकें। पूरी खबर पढ़ें…

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