मधुमक्खियां ठंडे खून वाली जीव, सर्दियों में गर्माहट को अपनाएं न्यूजपेपर विधि, पराली

भास्कर न्यूज | लुधियाना सर्दियों का मौसम मधुमक्खी पालन के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है, खासकर जब ठंडी हवाएं और बारिश कॉलोनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ठंडी हवाओं से बचाने के लिए हाइव्स को शरणस्थल पर रखना जरूरी है। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के माहिरों गुरप्रीत सिंह मक्कड़ और रितु राज ने मधुमक्खियों को बचाने के लिए मधुमक्खी पालकों को सुझाव दिए हैं। 1. वन अवरोधक जैसे झाड़ियां या अस्थायी संरचनाएं एक प्रभावी उपाय साबित हो सकती हैं। 2. हाइव्स में किसी भी दरार या छेद को मिट्टी या टेप से बंद कर देना चाहिए, ताकि ठंडी हवाओं से गर्मी का नुकसान कम हो सके। 3. जो कॉलोनियां कमजोर होती हैं या जिनमें रानी नहीं होती, वे सर्दी में अधिक कठिनाई झेलती हैं। इन कॉलोनियों को मजबूत कॉलोनियों के साथ जोड़ने के लिए “न्यूजपेपर विधि’ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में एक अखबार पर छोटे-छोटे छेद बनाए जाते हैं, ताकि दोनों कॉलोनियों की गंध मिल जाए, लेकिन मक्खियां एक-दूसरे के संपर्क में न आएं। इसके 2-3 दिन बाद अखबार के टुकड़ों को हटा दिया जाता है और दोनों कॉलोनियां मिलकर एकजुट हो जाती हैं। 4. मधुमक्खियां ठंडे खून वाली जीव होती हैं। उनका शरीर अपने पर्यावरण से प्रभावित होता है। सर्दी के मौसम में उन्हें गर्मी बनाए रखने के लिए हाइव्स के अंदर और बाहर इन्सुलेशन की आवश्यकता होती है। अंदरूनी पैकिंग में हाइव्स के खाली स्थानों में धान या गेहूं की पराली भरने से तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है। कमजोर कॉलोनियों में सभी फ्रेम को एक ओर धक्का देकर बाकी खाली स्थान को भूसी से भरा जाता है। बाहरी पैकिंग में हाइव्स के नीचे पराली की एक इंच मोटी परत बिछाई जाती है और फिर हाइव्स को प्लास्टिक की चादर से ढंक दिया जाता है, जिससे ठंडी हवाओं से बचाव होता है। खाद्य प्रबंधन के लिए 2:1 के अनुपात में चीनी और पानी का घोल हाइव्स में डाला जा सकता है, ताकि मख्खियों को अतिरिक्त भोजन मिल सके। यदि खाली कॉम्ब नहीं हैं, तो डिवीजन बोर्ड या प्लास्टिक फीडर्स का उपयोग किया जा सकता है। इन उपायों के जरिये सर्दी में भी मधुमक्खी कॉलोनियां सुरक्षित रहती हैं और उनका विकास जारी रहता है।

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