जिले के मेरगान निवासी युवा किसान यशपाल कुशवाह ने यह साबित कर दिया है कि नई सोच, नवाचार और निरंतर मेहनत से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनके पिता पिछले 15 वर्षों से परंपरागत तरीके से मधुमक्खी पालन कर शहद उत्पादन कर रहे थे, लेकिन बाजार में शहद के उचित दाम नहीं मिलने के कारण आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही थी। इस स्थिति को देखते हुए यशपाल ने पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने का निर्णय लिया। उन्होंने शुरुआत में 500 मधुमक्खी बॉक्स खरीदे और शहद उत्पादन बढ़ाया, लेकिन इसके बाद भी जब बाजार में शहद के मनचाहे दाम नहीं मिले तो उन्होंने नई तकनीक अपनाने की ठानी। उन्होंने मधुमक्खियों द्वारा शहद के साथ पैरों में लाए जाने वाले परागकणों को एकत्र करना शुरू किया। इन परागकणों से उन्होंने सुपरफूड ‘बी पोलन’ तैयार किया। इस नवाचार के बाद उनके उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ने लगी और बी पोलन को शहद की तुलना में करीब पांच गुना अधिक दाम मिलने लगे। इतना ही नहीं, जब कंपनियों ने शहद के उचित दाम नहीं दिए तो यशपाल ने स्वयं की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर ली। इससे स्थानीय बाजार में जहां पहले शहद का मूल्य करीब 100 रुपए प्रति किलो मिलता था,अब उन्हें 250 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा है। वहीं बी पोलन स्थानीय बाजार में 500 रुपए प्रति किलो और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1000 से 1500 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। मधुमक्खी पालन का यह कार्य, जिसे पिता ने दो पेटियों से शुरू किया था,आज बढ़कर करीब 1200 बॉक्स तक पहुंच चुका है।इस नवाचार से यशपाल खुद आत्मनिर्भर बने हैं,साथ ही क्षेत्र के किसानों से परागकण खरीदकर उनकी अतिरिक्त आमदनी भी सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे मधुमक्खी पालक किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डॉ. अशोक सिंह यादव के अनुसार बी पोलन मधुमक्खियों द्वारा फूलों से एकत्र किया गया पराग है, जिसे प्रकृति का संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और कमजोरी व थकान को दूर करने में सहायक है।
ऐसे निकालते परागकण: बॉक्स को चारों ओर से बंद रखा जाता है उसमें एक छोटा छेद होता है। इस छेद पर विशेष जाली लगाई जाती है, जिसमें मधुमक्खियों द्वारा लाए गए परागकण जमा हो जाते हैं। एक बॉक्स से 10 से 15 दिनों में लगभग 100 ग्राम परागकण एकत्र होता है,जिसे फिल्टर कर बी पोलन तैयार किया जाता है।


