केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त कर नया कानून लाने की तैयारी के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया है। यह आंदोलन ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत 11 जनवरी से होगी और यह फरवरी माह तक विभिन्न चरणों में चलेगा। मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ फलोदी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश प्रभारी राजेंद्र मूंड ने कहा कि मनरेगा गरीब, मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसे कमजोर करने या खत्म करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ कांग्रेस सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी। उन्होंने बताया कि यह अभियान राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा, जिसमें गांव-गांव तक जन जागरण किया जाएगा। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सलीम नागौरी ने आंदोलन की शुरुआत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास के साथ की जाएगी। यह प्रतीकात्मक विरोध फलोदी के अंबेडकर उद्यान में आयोजित होगा। इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क चौपाल आयोजित की जाएंगी। इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पत्र प्रधानों, पदाधिकारियों, रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों को सौंपे जाएंगे। गांवों और ब्लॉकों में नुक्कड़ सभाओं के जरिए पर्चे भी वितरित किए जाएंगे। 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर धरना होगा आंदोलन के अगले चरण में 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा। वहीं, 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय ‘मनरेगा बचाओ’ धरना आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंभ सिंह पातावत ने नए कानून के संभावित प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के कार्य ग्राम सभा तय करती थी, लेकिन नए बिल से फैसले दिल्ली में बैठकर होंगे। इससे गांवों की वास्तविक जरूरतें नजरअंदाज होंगी और ग्राम पंचायतें सिर्फ डेटा एंट्री सेंटर बनकर रह जाएंगी। महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष नीरू परिहार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय मनरेगा की 100 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी। हालांकि, नए प्रस्तावित कानून में 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे राजस्थान जैसे राज्यों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। ये रहे मौजूद इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष ईलमदीन मेहर, शीशपाल विश्नोई, अशोक व्यास, रामू माली, नटवर लाल मेघवाल सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।


