राजगढ़ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय पर प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना में हाल ही में किए गए संशोधन ग्रामीण मजदूरों के रोजगार अधिकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इसके विरोध में 11 जनवरी से 25 फरवरी तक क्रमबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। प्रियव्रत सिंह ने कहा, “महात्मा गांधी मनरेगा योजना के नाम और व्यवस्था में जो बदलाव किए गए हैं, वह ग्रामीण मजदूरों के अधिकार छीनने का काम है। कांग्रेस द्वारा दी गई मजदूरी गारंटी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर डाला था। इससे ग्रामीण संरचनाओं और आधारभूत अधोसंरचना का निर्माण भी हुआ है।” बोले- ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ने की संभावना
उन्होंने आंदोलन की रूपरेखा भी स्पष्ट की। 11 जनवरी से 29 जनवरी तक ग्राम पंचायत स्तर पर विरोध कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। 1 से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यालयों पर धरने और घेराव होंगे। इसके बाद प्रत्येक राज्य की विधानसभा का घेराव किया जाएगा और अंत में देश के चार प्रमुख जोनों में बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी। प्रियव्रत सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार का यह संशोधन मनरेगा की मूल भावना को समाप्त करता है। इससे मजदूरी गारंटी कमजोर हुई है, पंचायतों की भूमिका घट गई है और केंद्र का अंशदान 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने चेताया कि बजट सीमित, मौसम आधारित कार्य प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा कमजोर होने से ग्रामीण बेरोजगारी और संकट बढ़ने की संभावना है। संशोधनों का विरोध किया जाएगा
जिलाध्यक्ष ने जोर देकर कहा, “महात्मा गांधी ने इस देश के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई है, मजदूरों को हक दिलाने में योगदान दिया और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने में भी भूमिका निभाई। हम उनके आदर्शों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आंदोलन करेंगे।” कांग्रेस के इस आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत ग्रामीण स्तर, पंचायत, ब्लॉक, जिला और विधानसभा स्तर पर धरने, उपवास, जनसंपर्क और रैलियों के माध्यम से पूरे देश में भाजपा सरकार के संशोधनों का विरोध किया जाएगा।


