पिछले कई बरस से खैरागढ़ की मनोहर गौशाला न सिर्फ गायों के लिए बल्कि किसानों के लिए भी अपने कामों से ध्यान खींच रही है। यह न सिर्फ बीमार, घायल और बेसहारा गायों को आसरा दे रही है बल्कि गोमूत्र से फसल अमृत जैसा लिक्विड फर्टिलाइजर भी बना रही है जिससे यूरिया की खपत 25 फीसदी तक कम हो जाती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की है। लाखों किसानों को यह गौशाला लगभग मुफ्त में बनने वाली यह खाद बनाना सिखा चुकी है और ढाई लाख लीटर मुफ्त बांट चुकी है। लगभग मुफ्त बनता है लिक्विड फर्टिलाइजर गौशाला के ट्रस्टी डॉ. अखिल जैन बताते हैं कि फसल अमृत किसानों लगभग बिना लागत या अत्यंत न्यूनतम लागत में तैयार किया जा सकता है। गोमूत्र गौशालाओं व गांवों में सहज उपलब्ध रहता है। नीम और सीताफल की पत्तियां भी मिल जाती हैं और सूर्य का प्रकाश तो प्रतिदिन सहज प्राप्त हो जाता है। गोमूत्र के साथ नीम और सीताफल की पत्तियां को कुछ दिनों तक सूर्य के प्रकाश में रखने से यह लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार हो जाता है। वे पिछले 7 वर्षों में 12 राज्यों में जाकर 5 लाख से अधिक किसानों और बागवानों को इसे बनाने का प्रशिक्षण दे चुके हैं। फसल अमृत उत्पादन बढ़ाने वाला भी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिला डॉ. अखिल जैन को उनके इस काम के लिए। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य अहिंसा पुरस्कार दिया गया है। वहीं भारत सरकार के पशु कल्याण बोर्ड ने उन्हें ‘प्राणी मित्र अवार्ड’ प्रदान किया है। फसल अमृत के निःशुल्क वितरण के लिए उन्हें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है और इसी शोध एवं सेवा कार्य के परिणामस्वरूप उन्हें अमेरिकन पेस यूनिवर्सिटी द्वारा मानक पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई है। डॉ. जैन की पहली पुस्तक ‘गाय–एक वरदान’ की अब तक 2 हजार से अधिक प्रतियां निःशुल्क वितरित की जा चुकी हैं और इसके नए संस्करण की छपाई जल्द होने वाली है। उनकी नई पुस्तक ‘गाय–एक अनुसंधान’ भी पूर्ण हो चुका है और प्रकाशनाधीन है। पिछले कई सालों के मनोहर गौशाला दिवाली पर गोबर के दिए मुफ्त बांटती है जो देश विदेश तक जाते हैं।


