भास्कर न्यूज | लुधियाना पक्खोवाल रोड स्थित भाई बाला जी गुरुद्वारे में शुक्रवार को सालाना मेले का आयोजन हुआ। मेले की शुरुआत अरदास के साथ हुई, जिसके बाद कीर्तन दरबार और लंगर आयोजित किया गया। पंजाबभर से आई संगत ने गुरुद्वारे में हाजिरी लगाई और अपनी मुराद पूरी होने पर पतंग और जहाज चढ़ाए। गुरुद्वारे के बाहर पतंग-जहाज बेचने वालों की दुकानें सजीं, जहां श्रद्धालुओं ने खरीदारी की। इस दौरान पतंगबाजी भी हुई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। वहीं, संगत का मनाना है कि बाला जी गुरुद्वारे में जो लोग पंतंग व जहाज चढ़ाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है। यहां संतान की प्राप्ति के लिए और विदेश जाने के लिए संगत मन्नत मांगती है। यहां गुरुद्वारा प्रधान गुरमीत सिंह ने बताया कि हर साल फरवरी में लगने वाला यह मेला सिख संगत के लिए विशेष महत्व रखता है। भाई बाला जी, जिनका समाधि स्थल दाद गांव में स्थित है, छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब के आशीर्वाद से प्रसिद्ध हुए थे। फिरोजपुर रोड स्थित चौक, जहां से उनकी समाधि के लिए रास्ता जाता है, उन्हीं के नाम पर रखा गया है, लेकिन समय के साथ इसे गलत तरीके से भाई बाला चौक कहा जाने लगा है। नगर निगम ने इसका सही नाम भाई बाला चौक रखा है। यह मेला संगत की आस्था का प्रतीक बन चुका है। जैसे हरप्रीत कौर ने बताया कि पिछले साल उन्होंने इस स्थान पर आकर अपने बच्चे की मन्नत मांगी थी, जो इस साल पूरी हो गई। इस अवसर पर वह अपने बच्चे के साथ पतंग लेकर माथा टेकने आईं। वहीं, बिमला देवी ने बताया कि उन्होंने पिछले मेले में अपनी पोती के विदेश जाने की मन्नत मांगी थी, जो अब पूरी हो गई है। इस कारण वह अपनी पोती की मुराद पूरी होने पर जहाज और पतंग चढ़ाने आई हैं। इस मेले में हजारों संगत ने अपनी अरदास की और विभिन्न प्रकार के लंगर भी लगाए गए। आत्म नगर हलके के विधायक ने भी इस मेले में भाग लिया और पतंगबाजी की। इस दिन पक्खोवाल रोड पर पूरा बाजार सजा हुआ था, और घंटों ट्रैफिक जाम रहा, जिससे यह साबित होता है कि इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का कितना बड़ा प्रभाव है।


