अमृतसर| श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित 8 दिवसीय पावन श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महोत्सव के चौथे दिन भी भक्तों ने सृष्टि के रहस्यों को जाना। साध्वी गुरुमयी ने बताया कि माया हमें संसार के विषयों के प्रति आसक्त करती है। संसार में रह कर भी असक्ति न हो, उसके लिए वैराग्य की स्थिति में जाना होगा। वैराग्य हो पाए इसके लिए यह समझना आवश्यक है कि लिए माया ईश्वर की परछाई है। परछाई की जगह जिसकी परछाई है उसको पकड़ो, तो वैराग्य घटेगा व असक्ति छूट जाती है। तब संसार के सभी एश्वर्य आपके पीछे पीछे आएंगे। हम नजारे नहीं बदल सकते इसलिए हमें अपनी नजर बदलनी पड़ेगी और नजर केवल ईश्वर से जुड़ने पर ही बदल सकती है। भागवत कथा ईश्वर से जुड़ने के सभी सूत्र व ज्ञान प्रदान करती है जिसके श्रवण मात्र से ही मन को संसार का नहीं ईश्वर का रंग लगने लगता है।


