भास्कर न्यूज | फाजिल्का दुःख निवारण श्री बाला जी धाम के 18वें वार्षिक महोत्सव के उपलक्ष्य में श्री कल्याण कमल आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय श्री रामायण प्रवचन व श्री हनुमान चालीसा पाठ के चौथे दिन परम् श्रद्धेय महामंडलेश्वर 1008 स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते कहा कि रामायण का सबसे बड़ा संदेश यह है कि जीवन तभी सुंदर बनता है, जब मनुष्य अपने भीतर बोझ जमा करना बंद कर दे। उन्होंने समझाया कि रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें, तनाव, असमंजस और तकरार मन को भारी बना देती हैं। यह भारी मन मनुष्य को सही रास्ता देखने से रोक देता है। रामायण हमें सिखाती है कि मन जितना साफ़ होगा, जीवन उतना ही सहज और सफल बनेगा। उनके साथ आए सहयोगी शिष्य 108 स्वामी सुशांतानंद गिरी द्वारा श्री राम चर्चा व भजनों का गुणगान किया गया। महाराज जी ने कहा कि आज लोग बाहरी दिखावट और उपलब्धियों को जीवन की कसौटी मान बैठे हैं, जबकि वास्तविक उन्नति वह है जो मनुष्य को भीतर से हल्का कर दे। जिस व्यक्ति का मन शांत हो, उसके शब्द में मिठास, व्यवहार में नम्रता और निर्णयों में स्पष्टता आ जाती है। रामायण इसी अंतर्मुखी विकास की शिक्षा देती है जहाँ मनुष्य अपनी कमियों, प्रतिक्रियाओं और इच्छाओं को समझते हुए धीरे-धीरे उन्हें संयमित करना सीखता है। उन्होंने बताया कि जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बाहरी समस्याएँ नहीं, बल्कि भीतर चल रही असमानता है। मन में जब असंतुलन होता है, तो साधारण सी बात भी पहाड़ बन जाती है। लेकिन यदि मन स्थिर हो, तो कठिन परिस्थिति भी मार्ग खोलने लगती है। रामायण यही कहती है कि जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहेंगी, लेकिन उनका प्रभाव हमारे भीतर कितना प्रवेश करे यह हमारा निर्णय है। स्वामी ने कहा कि मन में जब काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष जैसे तत्व बढ़ जाते हैं, तो मनुष्य का निर्णय कमजोर हो जाता है। वह यह भूल जाता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और वह किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि आज लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में अपनी आंतरिक शांति, पारिवारिक संबंधों और मानसिक संतुलन को खो रहे हैं। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि रामायण जीवन को यह याद कराती है कि मनुष्य का सबसे बड़ा युद्ध बाहरी नहीं, बल्कि उसके भीतर चल रहा होता है। यह संघर्ष अपनी इच्छाओं, असंतोष और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण पाने का संघर्ष है। जब व्यक्ति अपने भीतर के इन विकारों को पहचान लेता है, तभी जीवन का मार्ग प्रकाशमान होता है। कथा के उपरांत सामूहिक आरती की गई, जिसके बाद प्रसाद वितरित किया गया। भास्कर न्यूज | फाजिल्का स्थानीय बीकानेर रोड स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर के प्रांगण में महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरी महाराज अपने शिष्य स्वामी सुशांन्तानन्द गिरी महाराज के साथ विशेष रूप से पधारे। मंदिर पहुंचने पर मंदिर कमेटी की ओर से उनका माल्यार्पण व पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरी महाराज ने प्रवचन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रवचन उपरांत विधिवत आरती का आयोजन किया गया। आरती के बाद महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरी महाराज ने बाबा विश्वकर्मा जी, पंचमुखी हनुमान जी एवं दुर्गा माता को चांदी के मुकुट धारण करवाए। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नत्थू राम नायक एवं पुजारी पंडित विकास शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के सहयोग से बाबा विश्वकर्मा जी, पंचमुखी हनुमान जी एवं दुर्गा माता जी के लिए चांदी के मुकुट सरदारशहर से तैयार करवाए गए हैं। मंदिर कमेटी ने महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरी महाराज का हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिन्होंने मंदिर प्रांगण में पधार कर श्रद्धालुओं को निहाल किया। इस अवसर पर फूल चंद जांगिड़, शाम लाल जांगिड़, सुखदेव सिंह सैनी, बिरमानंद जांगिड़, नरेश जुनेजा, नरेश अरोड़ा, जय लाल, भारत भूषण गर्ग, रामेश्वर सुथार, राजेश धूड़िया, सुरेन्द्र बजाज नीटा, राणी धवन, अंजू धूड़िया, श्री बालाजी सुंदर कांड महिला सत्संग मंडल की सदस्यगण, मास्टर अर्जुन, राजकुमार सिंगाठीयां , बाबूराम, भगवान दास कंबोज, बूटा राम कंबोज, महिल सिंह, वेद प्रकाश, कश्मीर सिंह, मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व मंदिर कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।


