सरकारी में 12 तो निजी स्कूलों में भी 9 लाख बच्चे कम हो गए मध्य प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। साल 2016 से 2024 तक 8 साल में ही सरकारी और निजी स्कूलों में कुल मिलाकर 22 लाख बच्चों की कमी हुई है। सरकारी स्कूलों में 12.23 लाख तो निजी स्कूलों में 9.26 लाख बच्चे कम हो गए। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को विधायक प्रताप ग्रेवाल एक सवाल के जवाब में विधानसभा में दी। आबादी बढ़ी, फिर भी गिरावट क्यों? मप्र में 2011 से 2023 के बीच जनसंख्या में 1 करोड़ से अधिक की वृद्धि हुई, लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या घटती रही। सरकारी और निजी स्कूलों में आंकड़े सरकारी स्कूलों में गिरावट निजी स्कूलों में गिरावट ये हालात तब : बजट 80% बढ़ा, सालाना 34 हजार करोड़ खर्च रुपए, मुफ्त किताबें अलग से सरकार का स्कूल शिक्षा बजट सात वर्षों में 80% बढ़कर 16,226 करोड़ रुपए (2016-17) से 29,468 करोड़ रुपए (2023-24) हो गया। बच्चों पर प्रति माह औसतन 34 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं। मंत्री बोले- बच्चों की जनसंख्या ही घट गई मंत्री ने बताया कि जो बच्चे कम हुए हैं, उसकी वजह पढ़ाई छोड़ना है। इसके अलावा प्राइमरी यानी पहली से पांचवी कक्षा तक जो 6 लाख बच्चे कम हुए हैं, उसकी वजह 0 से 6 साल के बच्चों की कमी होना है। इसलिए स्कूलों में बच्चे कम हो रहे हैं। …लेकिन हकीकत बच्चे बढ़े… मप्र की जनसंख्या 2023 के अनुसार 8.77 करोड़ है। प्रदेश की साक्षरता दर 74.03% है। वर्तमान में 0 से 6 साल के बच्चे 1.20 करोड़ हैं। मप्र में 2011 में 0 से 6 साल के 1.08 करोड़ बच्चे थे। ऐसे में बच्चों की संख्या 12 लाख बढ़ी है। 14 साल में 46 लाख बच्चों की कमी


